यह है शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाने की सटीक विधि, जानिए कहीं आप गलत तो नहीं चढ़ा रहे

बिल्वपत्र को भारतीय शास्त्रों में बहुत ही पवित्र वृक्ष माना गया है। कहा गया है कि इसके जड़ों में भगवान शिव का वास होता है। हर सावन सोमवार को भगवान शिव को अर्पित होता है। लेकिन भगवान शिव को अर्पित करने से पहले बिल्वपत्र तोड़ने और इसे चढ़ाने की कुछ विशेष विधि भारतीय शास्त्रों में बताई गई है। हमें इसी विधि का पालन करना चाहिए वरना हमें कहीं शिव का रूद्र रूप का सामना ना पड़े।

यह है शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाने की सटीक विधि, जानिए कहीं आप गलत तो नहीं चढ़ा रहे

बिल्वपत्र कब तोड़ना चाहिए?

बेलपत्र तोड़ने से पहले यह ध्यान रखें कि उस दिन सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, अमावस्या या संक्रांति का कोई दिन नहीं होना चाहिए। इस दिन बिल्वपत्र को तोड़ना बिल्कुल वर्जित है। बिल्वपत्र को शास्त्रों में पीड़ा हरक कहा गया है। इस वृक्ष को कई अन्य नामों में जाना जाता है जैसे कि बेलपत्र, श्री फल और भी अन्य नाम है।

बिल्वपत्र अर्पित करते हुए इन बातों का रखें ध्यान

भगवान शिव को अर्पित करते वक्त इस बेलपत्र की डंडी हमारी ओर एवं इसका मुलायम भाग शिवलिंग की ओर तथा खुरदरा भाग ऊपर होना चाहिए। इन बातों का अर्पित करते समय विशेष ध्यान रखें।

इस मंत्र का करे जाप

बिल्वपत्र को अर्पित करते समय भगवान शिव का एक मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए जो आगे बताया गया है। त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रंच त्रयायुधम् त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्।

भगवान शिव को बिल्वपत्र क्यों अर्पित करते हैं?

बिल्वपत्र मुख्य त्रिदल होता है जिसे भगवान शिव का अवतार माना गया है। इसे तम, रज और सत्व निवारक माना गया है। इसे अर्पित करते समय कौमार्य, यौवन और जरा अवस्था से परे होने की मनोकामना करें ताकि इस शरीर मोक्ष को प्राप्त हो

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