World Cup के बाद विराट कोहली का पहला इंटरव्यू, किए कई खुलासे

वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद खिताब से चूकने वाली टीम इंडिया अब इससे उबर चुकी है। कप्तान विराट कोहली अपने व्यस्त रूटीन, जिम और शूट में समय बिता रहे हैं। बाकी खिलाड़ी भी अपने अगले मिशन यानी वेस्ट इंडीज सीरीज पर फोकस कर रहे हैं। उनसे टीम के मूड से लेकर ड्रेसिंग रूम के अंदर की बात तक जानने की कोशिश की गई। विराट ने भी खुलकर सवालों के जवाब दिए। पढ़िए उनके इस इंटरव्यू के अंश…

चेंज रूम में नहीं डांटने वाला माहौल

विराट कोहली ने कहा, ‘डांटने वाला माहौल तो अब चेंज रूम में भी नहीं है। जितना दोस्ताना व्यवहार मेरा कुलदीप यादव के साथ है, वैसा ही महेंद्र सिंह धोनी के साथ है। माहौल ऐसा है कि कोई भी अपनी बात किसी से कह सके। मैं खुद अब लोगों के पास जाकर कहता हूं- देखो ये गलतियां मैंने की हैं, तू मत करना।’

नाकामयाबी से सीखा बहुत
टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली ने कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में हार और नाकामयाबी से काफी कुछ सीखा है। उन्होंने कहा, ‘बुरे वक्त ने मुझे ना केवल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया बल्कि एक इंसान के तौर पर भी मुझमें सुधार हुआ। इससे मुझे खराब दौर की अहमियत सफलता से ज्यादा महसूस हुई। इससे मुझे लगा कि बैठकर सोचें कि अब क्या करने की जरूरत है और अपने लिए रोडमैप तैयार करें।’

ऐसे समय में टीम को समझाना
उन्होंने कहा, ‘खराब दौर में हम टीम से बात करते हैं। तब मैं कहता हूं कि जिस तरह का प्रदर्शन आपने किया, उस पर गर्व होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि आप अपने किए पर विनम्र रहें लेकिन उसी पल आप खुद को इतना भी कम ना मानें कि आपकी सराहना ही ना हो। इसमें बैलेंस बेहद जरूरी है।’

मेहनत करना जरूरी
विराट ने कहा कि मेहनत करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘यदि आप छोड़ दें तो आपका सफर समाप्त। इसमें कोई विकल्प नहीं है। आपको मेहनत करनी होती है, उन्हीं चीजों को दोबारा से करना होता है। नियमितता और सफलता कुछ नहीं है, बल्कि उन्हीं चीजों को दोहराना होता है।’

उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के तौर पर आप गोल्फ को देखें, जहां एक प्लेयर कोई शॉट बार-बार लगाता है। फिर भले ही यूएस ओपन चैंपियंस ही क्यों ना हों, एक ही चीज को बार-बार करते हैं क्योंकि वह भी जानते हैं कि प्रेशर में एक वही बात होती है जिस पर भरोसा किया जा सकता है।’

जिंदगी का यही लक्ष्य
विराट ने कहा, ‘एक पेशेवर क्रिकेटर के लिए यह खेल ही सब कुछ होता है। मेरी जिंदगी में लक्ष्य वही है जो मुझे और मेरी पत्नी का हमारे परिवारों ने पालन-पोषण किया, वही हम चाहते हैं। वही चीजें हमारी प्राथमिकता बन जाती हैं। आपको यह समझना होगा कि यह सब एक दिन तो खत्म होना है।’

धर्म पर बोले विराट
विराट ने कहा, ‘मैं कोई धार्मिक व्यक्ति नहीं हूं और कभी किसी धर्म से बंधकर नहीं रहा। मैं खुले दिल से सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और हर तरह के लोगों को स्वीकार करता हूं। मुझे लगता है कि सभी आध्यात्मिक होते हैं, हमें कभी-कभी यह महसूस नहीं होता लेकिन हम सभी एक समान हैं।’

नए खिलाड़ियों से करते हैं बातचीत
टीम में नए खिलाड़ियों से ज्यादा बातचीत को लेकर विराट ने कहा, ‘ऋषभ पंत, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर जैसे युवा खिलाड़ी शानदार हैं। उनमें गजब का आत्मविश्वास है। मैंने पहले भी कई बार कहा है कि 19-20 साल की उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास होता है, उनमें कहीं ज्यादा है। प्रतिभा बड़े टूर्नमेंट में खेलने से निखरती है जैसे आईपीएल। वे अपनी गलतियों से बहुत जल्दी सीखते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘आपका करियर 2-3 साल के बाद सुधरता है। मुझे लोगों को मजबूती देने में भरोसा है। मुझे लगता है कि उन्हें मौका दो कि वे खुद के बारे में कह सकें। आपको उससे ज्यादा खेलना होता है, जितना आप खेल चुके होते हैं।’

दबाव में सभी खिलाड़ी एक जैसे
टीम इंडिया के कैप्टन ने कहा, ‘मैं दूसरे खेलों के खिलाड़ियों से भी मिलता हूं। मैं लिएंडर पेस से मिला और उनसे टेनिस के बारे में बात की, हाल में मैंने इंग्लैंड के फुटबॉलर हैरी केन से मुलाकात की। हर खेल के अलग नियमों के बावजूद, आप उन लोगों को देखें जिन्होंने अपने-अपने खेल में बेहतर किया। आप किसी भी खिलाड़ी से दबाव की परिस्थितियों के बारे में कहेंगे तो वे अपनी बात को साफ तौर पर रखेंगे।

2012 के बाद बदला बहुत कुछ
विराट ने बताया कि जब वह 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रहे थे, तब उन्हें समझ आया कि विश्व क्रिकेट में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है। हमारे ट्रेनर शंकर बसु ने मुझे फिटनेस लेवल में बदलाव की बात समझाई। उन्होंने कहा कि यदि फिटेनस स्तर में बदलाव नहीं हुआ तो आप इन खिलाड़ियों से पार नहीं पा सकते। मैं उनके साथ पिछले कई साल से काम कर रहा हूं।’

120 प्रतिशत देते रहेंगे
टीम इंडिया के कैप्टन ने कहा, ‘मैं कभी किसी से नहीं कहता कि ये करो- वो करो। मैं अपना काम करता हूं, मैं जिम में अपना समय बिताता हूं, प्रैक्टिस सेशन में वक्त देता हूं। मैं अपना 120 प्रतिशत देता रहूंगा। लोग मेरी तरफ देखते हैं और कहते हैं कि यह 11 साल से खेल रहा है, चाहे तो आराम से बैठ सकता है। इन्होंने इतना परफॉर्म किया, फिर भी ऐसा क्यों करता है। फिर उन्हें खुद ही लगता है- हम क्यों नहीं कर सकते।’

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