अब चाइनीज नहीं बल्कि स्‍वदेशी उत्पादों की बढ़ी डिमांड, इस कारण बदल गई है सोच

 कोरोना वायरस संक्रमण से पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। लॉकडाउन में अभूतपूर्व बदलाव भी लोगों में दिखा। वह यह कि विदेशी खास कर चाइनीज आइटमों के प्रति अरुचि दिखी तो स्‍वदेशी उत्‍पादों की मांग भी बढ़ गई है। लॉकडाउन में लोग घरों में ही रहकर अपने कार्यों का निस्‍पादन करने लगे। बच्‍चों की पढ़ाई, ऑफिस वर्क और बिजनेस आदि कामों के लिए इलेक्‍ट्रानिक गैजेट्स का जमकर प्रयोग हुआ। इसका असर इलेक्‍ट्रानिक बाजार खुलने के बाद अनलॉक 01 में भी देखने को मिला। दुकानों में स्‍वदेशी की मांग बढ़ गई है।अब लोग आंख मूंदकर विदेशी उत्पादों को नहीं खरीद रहेलॉकडाउन के दौरान घरों में बंद लोगों के लिए सबसे ज्यादा जरूरत का साधन इलेक्ट्रानिक गैजेट्स बने। ऑनलाइन क्लासेज से लेकर मनोरंजन तक सभी में मोबाइल, लैपटाप, टैबलेट का काफी प्रयोग किया गया। अनलॉक के बाद बाजार खुले तो मोबाइल, लैपटाप, टैबलेट के अलावा इलेक्ट्रानिक सामानों खासकर एसी की बिक्री बढ़ी। हालांकि अब लोग आंख मूंदकर विदेशी उत्पादों को नहीं खरीद रहे हैं। खासकर चाइनीज उत्पादों से लोगों का रुझान खत्म हो रहा है। नतीजतन, चाइनीज मोबाइल, एसेसरीज की बिक्री में करीब 30 फीसद तक गिरावट हुई है।इलेक्ट्रानिक्स कारोबार में करीब 50 फीसद की कमीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल-वोकल की अपील का असर लोगों पर पडऩे लगा है। ऑनलाइन क्लासेज, वर्क फ्राम होम के कारण मोबाइल के साथ ही लैपटाप और टैबलेट की बिक्री पहले की तुलना में करीब 10-15 फीसद बढ़ी। वहीं ओवरआल इलेक्ट्रानिक्स कारोबार में करीब 50 फीसद की कमी हुई है। बताते हैं कि पहले एक दिन में एक करोड़ का मोबाइल का औसत कारोबार होता था।चाइनीज मोबाइल की बिक्री में करीब 25-30 फीसद की कमीइलेक्ट्रानिक्स सामानों के थोक कारोबारी मिथलेश सिंह का कहना है कि लोग भारतीय प्रोडक्ट खोज रहे हैं। हालांकि  उनकी च्वाइस और जरूरत के उत्पाद बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। चाइनीज मोबाइल की बिक्री में लगभग 25-30 फीसद की कमी आई है।बोले, इलाहाबाद मोबाइल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्षइलाहाबाद मोबाइल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन गुप्ता कहते हैं कि पहले बाजार में कस्टमर ओपो, वीवो, एमआइ का मोबाइल खरीदते थे। वहीं अब ग्राहक कहते हैं कि चाइनीज मोबाइल नहीं चाहिए, कोई और कंपनी का मोबाइल दिखाइए। कुछ लोग विकल्प न होने पर खरीद लेते हैं मगर कई लोग विकल्प का इंतजार करते हैं। चाइनीज मोबाइल की बिक्री में करीब 20-25 फीसद की कमी आई है।केके सेल्स के प्रोपराइटर ने यह कहाकेके सेल्स के प्रोपराइटर केके श्रीवास्तव ने कहा कि लोकल-वोकल को लेकर लोगों में काफी जागरूकता आई है। अब लोग मना करने लगे हैं कि उन्हें चाइनीज मोबाइल नहीं चाहिए। पुलिस मुख्यालय के सत्येंद्र तिवारी को दो मोबाइल खरीदना था, उन्होंने साफ मना कर दिया था। फिर दूसरी कंपनी का मोबाइल खरीदा। इंडियन कंपनी लॉयड की एसी की बहुत डिमांड हैं। कई दिन बिक्री में नंबर एक पर रहता है। जानिए क्या कहते हैं ग्राहकइंडियन मोबाइल चाहते थे। बाजार में बहुत तलाश की लेकिन जिस तरह के मोबाइल की जरूरत थी, वह नहीं मिला। तब मजबूरी में ओपो का खरीदना पड़ा, क्योंकि ऑनलाइन क्लास के लिए कई तरह के ऐप डाउनलोड करने पड़ते हैं।– प्रशांत सिंह, सहायक अध्यापक बेसिक शिक्षाबेटा आदित्य प्रताप कक्षा नौ में पढ़ता है। उसे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदना था। इंडियन कंपनी का मोबाइल चाहते थे लेकिन उपलब्ध न होने के कारण ओपो का खरीदना पड़ा। अगर इंतजार करते तो बेटे की पढ़ाई का नुकसान होता।– अजय सिंह, राजरूपपुर