अमेजन और फ्लिपकार्ट पर शॉपिंग करने वालों के लिए बड़ी खबर! नए साल में बदल जाएंगे ये नियम

सरकार नए नियम 31 मार्च से पहले लागू करने की तैयारी में है.

ग्राहकों को ई-कामर्स कंपनियों की मनमानी से बचाने वाले नियम 31 मार्च से पहले ही लागू होंगे. प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कंज्यूमर ऑफेयर मंत्रालय ने इन नियमों को 31 मार्च से पहले लागू करने का लक्ष्य तय किया है. इन नियमों के लागू होने के बाद ई-कामर्स कंपनियां उत्पादों के दाम प्रभावित नहीं कर सकेगी. प्रधानमंत्री गवर्निंग काउंसिल की बैठक में ये जानकारी दी गई.

मिल सकेगा 24 घंटे में रिफंड- इस पर 2 दिसंबर तक सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए थे. विभाग सभी स्टेकहोल्डर्स के सुझावों का अध्ययन कर रहा है. ये नियम नए कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत लागू होंगे. इन नियमों से नकली उत्पादों की ब्रिकी रुकेगी और कंपनियों की जवाबदेही तय होगी. रिफंड प्रकिया सुधरेगी और 24 घंटे में रिफंड मिलेगा.

गुमराह करने वाले विज्ञापन नहीं दे सकेंगी कंपनियां- कंपनियां गुमराह करने वाले विज्ञापन नहीं दे सकेंगी. कंपनियों को भारत में रजिस्टर करना जरूरी होगा. कंपनियां प्रोडेक्टस के दाम प्रभावित नहीं कर सकेंगी और कंपनियों को ग्राहकों को ब्रिकी से पहले सही जानकारी देनी होगी.

>> रिसर्च फर्म गार्टनर ने दावा किया, ऑनलाइन शॉपिंग की आदत इस कदर बढ़ जाएगी कि 2024 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस लत को विकार घोषित कर देगा. 2022 तक हर साल ऑनलाइन शॉपिंग में 10 फीसदी का इजाफा दर्ज किया जाएगा.

>> रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन खरीदारी की आदत मनोवैज्ञानिक विकार का रूप ले सकती है.

>> ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये लोग अपनी जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने लगते हैं, ऐसा करते वक्त वे अपनी आय का दायरा भी भूल जाते हैं और इससे काफी अधिक बढ़-चढ़कर सामान खरीदते हैं.

>> इस कारण उन पर वित्तीय संकट बढ़ेगा और तनाव में भी इजाफा होगा. डब्ल्यूएचओ दुनियाभर में इस ऑनलाइन शॉपिंग के इस पहलू पर बारीकी से नजर बनाए हुए है.

>> रिपोर्ट में दावा किया कि ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती सुगमता से लाखों लोगों पर वित्तीय संकट और बढ़ेगा. दरअसल अधिकतर ऑनलाइन विक्रेता अपने यहां बिक्री बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेते हैं.

>>  इससे वह लोगों को टारगेट करते हुए उन्हें बेवजह और अधिक खरीदारी करने के लिए मजबूर कर देते हैं. इसके फेर में आकर उपभोक्ता अपनी जरूरत और क्षमताओं से अधिक खरीदारी करने लगते हैं.

>> लोगों के लिए रोजगार का संकट भी खड़ा होगा और लाखों लोगों का मेहनत से कमाया पैसा गैरजरूरी चीजें खरीदने पर भी खर्च होगा.