इस कंपनी में हफ्ते में 4 दिन काम करते हैं कर्मचारी, 3 दिन रहती है छुट्टी

किसी भी कंपनी या कार्यालय में काम करने वाला महिला या पुरुष कर्मचारी जब सप्ताह के 6 दिन काम करने के बाद एक साप्ताहिक छुट्टी पाता है, तो मानो उसे राहत का ख़जाना मिल जाता है। ऑफिस में प्रति दिन 8 से 9 घंटे काम करने के बाद आराम करना भला किसे पसंद नहीं आता है और ऐसे में यदि छुट्टी एक से बढ़ कर डबल हो जाए तो ? तो कर्मचारी की खुशी देखते ही बनती है, लेकिन जापान में विश्व विख्यात कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले महीने अपने 2,300 कर्मचारियों को सप्ताह में 3 दिन की छुट्टी दी और उनसे सप्ताह में केवल 4 दिन ही काम लिया। इससे कर्मचारियों को भले ही काम कम करना पड़ा, परंतु कंपनी के मुनाफे में कोई कमी नहीं आई।

जापान वैसे तो अपने कर्मचारियों को सुविधाएँ देने के मामले में सदैव ही अपना हाथ तंग रखता है, परंतु इस बार उसने चौंकाने वाला कारनामा किया और उसके परिणाम भी आश्चर्यचकित करने वाले मिले हैं। एक योजना के तहत माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने इस कार्य को अंजाम दिया था। दरअसल, वर्किंग रिफॉर्म प्रोजेक्ट (Working Reform Project) के तहत माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने जापान (Japan) की अपनी यूनिट में कर्मचारियों के लिए अनूठी पहल करते हुए एक महीने के लिए वर्क-लाइफ च्वाइस चैलेंज समर-2019 (Work Life Choice Challenge Summer-2019) का आयोजन किया था।

कंपनी की प्रोडक्टिविटी में हुई वृद्धि

कंपनी के लिए इस अनूठे कार्यक्रम का परिणाम बहुत ही सुखद और लाभकारी सिद्ध हुआ। इससे न केवल कर्मचारी, अपितु कंपनी को भी लाभ हुआ। इस कार्यक्रम से कंपनी की प्रोडक्टिविटी में 39.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही बिजली की खपत में भी 23.1 प्रतिशत की कमी आई। सप्ताह में केवल 4 दिन काम होने से कंपनी के अंदर होने वाली बैठकें जल्दी समाप्त होने लगीं और कई मीटिंग्स तो आमने-सामने होने के बजाय वर्चुअल हो गईं। इसके परिणाम स्वरूप निर्णय जल्दी लिए जाने लगे। इससे काम में भी तेजी आई और उत्पादकता बढ़ गई। जापान की तरह यदि अन्य देश भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करें, तो अवश्य ही कंपनी और कर्मचारी दोनों के लिये उन्नति के द्वार खुल सकते हैं।

भारत में लोग समय से अधिक करते हैं काम

यदि भारत की बात की जाए, तो देश में भले ही कानूनी रूप से काम करने का समय 8 घंटे का है, परंतु इसका पालन केवल सरकारी कार्यालय ही करते हैं। अधिकांश प्राइवेट कंपनियाँ या फैक्टरियाँ आज भी अपने यहाँ काम करने वालों से 12 घंटे तक काम कराती हैं, जबकि ये एक प्रकार से श्रमिकों का शोषण ही है। 2016 के आँकड़ों के अनुसार भारत लोगों से काम कराने की अवधि में 36 देशों में चौथे स्थान पर था, वहीं मैक्सिको प्रथम, दक्षिण कोरिया दूसरे और ग्रीस तीसरे स्थान पर था। भारत सरकार को इस दिशा में एक प्रभावी कानून बनाने की आवश्यकता है और उसका सख्ती से पालन कराना भी अत्यावश्यक है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की पहली आवर्ती श्रम बल सर्वे (PLFS) के आँकड़ों के अनुसार अपने वैश्विक साथियों की तुलना में भारत के लोग सबसे अधिक घंटों तक काम करते हैं। एनएसएसओ के सर्वे के अनुसार जुलाई-जून 2018 में औसत शहरों में लोगों ने सप्ताह में 53 से 54 घंटे और गाँवों में 46 से 47 घंटे काम किया।

अमेरिका भी करता है केवल 8 घंटे काम

1886 में अमेरिका के मजदूर संगठनों ने काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे तय करने के लिए हड़ताल की थी। हड़ताल के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने शिकागो की हेय मार्केट में बम फोड़ दिया था, जिसके चलते अमेरिकी पुलिस ने मजदूरों पर गोलियाँ चलाई थीं। इस घटना में लगभग 7 मजदूरों की मौत हो गयी थी। इसके बाद से ही अमेरिका ने मजदूरों के एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे सुनिश्चित कर दी थी। मौजूदा समय में भारत सहित विश्व के अधिकतर देशों में मजदूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित कानून है।

बदल रहे हैं काम करने के तरीके

कामकाजी सप्ताह की संरचना विभिन्न देशों में व्यवसायों और संस्कृतियों के अनुसार काफी भिन्न है। पश्चिमी देशों में वेतनभोगी श्रमिकों के बीच, कामकाजी सप्ताह अक्सर सोमवार से शुक्रवार या शनिवार तक का होता है और सप्ताहांत व्यक्तिगत काम और अवकाश के रूप में होता है। पश्चिमी देशों में रविवार को सप्ताहांत दिवस या छुट्टी के दिन के रूप में अलग रखा गया है, क्योंकि यह ईसाई सब्त का दिन है। अमेरिका में पारंपरिक व्यावसायिक का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक का है। सोमवार से शुक्रवार तक, पांच से आठ घंटे के दिनों का वर्कवेक जिसमें कुल 40 घंटे शामिल हैं। कई आधुनिक कार्यस्थल कार्यबल में परिवर्तन और निर्धारित कार्य की मूल संरचना के साथ प्रयोग करते रहते हैं। फ्लेक्सटाइम (Flextime) कार्यालय के कर्मचारियों को सुबह 10:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक ऑफिस में काम करने की अनुमति दी जाती है। आम तौर पर उन कर्मचारियों को, जिनका घर ऑफिस से दूर है। टेलकम्यूटिंग (Telecommuting) कंपनी अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देती है, क्योंकि इससे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक आवागमन को कम करने में सहायता मिलती है। ऐसे श्रमिकों को घंटे के अनुसार काम करने के लिए भुगतान किया जाता है।