इस बार नाग-पंचमी पर ऐसे करें पूजा, मिलेगा कालसर्प दोष से छुटकारा

नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष नाग पंचमी का त्यौहार 25 जुलाई को मनाया जायेगा।

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक

अवधि: 2 घंटे 43 मिनट

नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध चढ़ाकर पूजा की जाती है. घर के दरवाजे पर दूध रखने की भी परंपरा होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के आगे दूध रखने से नाग दूध पी लेते हैं, इससे नाग देवता प्रसन्न होते हैं.

नागपंचमी की पूजा विधि

देश के अलग-अलग जगहों पर नागपंचमी की पूजा अगल तरीके से की जाती है. उत्तरी भारत में लोग सुबह उठकर घर के आगे या पूजा स्थान पर गोबर से नाग बनाते हैं और उनकी दूध, दूब, कुश, चंदन, अक्षत, फूल आदि से पूजा करते हैं.

दक्षिण महाराष्ट्र और बंगाल में यह बड़ा पर्व होता है. केरल में शेषनाग की पूजा होती है. वहीं पश्चिम बंगाल, असम और उड़ीसा में इस दिन नागों की देवी मां मनसा की पूजा की जाती है. इसी के साथ ही पूरे उत्तर भारत में इस दिन का विशेष महत्व है

कुछ जातक इस दिन मां सरस्वती की पूजा भी करते हैं. दरअसल यह मान्यता है कि सर्पों में बौद्धिक बल होता है. इसलिए इसदिन सर्पों के साथ मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है. घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए भी इस दिन व्रत रखा जाता है. इससे सर्पदंश का भय दूर होता है.

ऐसे करें पूजन:

– सबसे पहले प्रात: घर की सफाई कर स्नान कर लें.

– इसके बाद प्रसाद के लिए सेवई और चावल बना लें.

– इसके बाद एक लकड़ी के तख्त पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर नागदेवता की मूर्ति या तस्वीर रख दें.

– फिर जल, सुगंधित फूल, चंदन से अर्ध्य दें.

– नाग प्रतिमा का दूध, दही, घृ्त, मधु ओर शर्कर का पंचामृ्त बनाकर स्नान कराएं.

– प्रतिमा पर चंदन, गंध से युक्त जल अर्पित करें.

– नये वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, हरिद्रा, चूर्ण, कुमकुम, सिंदूर, बेलपत्र, आभूषण और पुष्प माला, सौभाग्य द्र्व्य, धूप दीप, नैवेद्ध, ऋतु फल, तांबूल चढ़ाएं.

– आरती करें.

– अगर काल सर्पदोष है तो इस मंत्र का जाप करें:

” ऊँ कुरुकुल्ये हुं फट स्वाहा”