इस भारतीय क्रिकेटर ने छीन ली थी पाकिस्तान के जबड़े से जीत, पर आज है गुमनामी के अंधेरे मे..

भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले हाईवोल्टेज ही रहते हैं। 18 जनवरी 1998 को दोनों टीमों के बीच ढाका में खेले गए इंडिपेंडेंस कप के फाइनल मुकाबले को भला कौन भूल सकता है, जब ऋषिकेश कानितकर के चौके ने जीत की दहलीज पर खड़ी पाकिस्तान के जबड़े से जीत छीन ली थी लेकिन इस खिलाड़ी को आज शायद ही कोई जानता हो।
पाकिस्तान ने सधी हुई शुरुआत की. हालांकि ओपनर शहीद अफ्रीदी को भारत ने जल्दी ही पवेलियन भेज दिया था. यहां तक कि बारहवें ओवर में आमीर सोहेल को भी आउट कर दिया था. लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ी का बुरा समय शुरू हो गया. ओपनर सईद अनवर और एजाज़ अहमद की जोड़ी ने खूंटा गाड़ दिया. ना सिर्फ खूंटा गाड़ा, बल्कि भारत के बॉलर्स के बखिये उधेड़ कर रख दिए.196 गेंदों में 230 रन की पार्टनरशिप कर डाली. दोनों ने शतक ठोक दिए. सईद अनवर ने 140 रन बनाए. एजाज़ अहमद ने 117. मैच ख़त्म होने तक पाकिस्तान ने स्कोर बोर्ड पर 314 रन टांग दिए थे. वो भी सिर्फ 48 ओवर में. ख़राब मौसम की वजह से दो ओवर की कटौती हुई थी.
पाकिस्तान को जवाब देने उतरी भारतीय टीम ने ताबड़तोड़ शुरुवात की। सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली कि जोड़ी ने महज़ 8 ओवर में 71 रन जोड़ लिए थे। मगर फिर शहीद अफरीदी कि गेंद पर तेंदुलकर आउट हो गए। गांगुली ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और शतक पूरा किया। उनका साथ देने आए रॉबिन सिंह ने भी 82 रन जोड़े लेकिन उनके आउट होते ही विकेट की झड़ी लग गई। एक के बाद एक भारतीय बल्लेबाज़ आउट होकर पवेलियन लौट गए।
एक समय पर आसान लगने वाली जीत अब मुश्किल लगने लगी। 48 ओवर के मैच में भारतीय टीम ने 47 ओवर ख़त्म होने पर 7 विकेट गवाकर 306 रन बना लिए थे। आखिरी ओवर में 9 रन चाहिए थे और क्रीज़ पर थे ऋषिकेश कानितकर और जवागल श्रीनाथ। मैदान में अँधेरा था. इस बीच सक़लैन मुश्ताक अपना अंतिम ओवर लेकर आए। पहली गेंद पर कानितकर ने एक रन लिया।
अगली गेंद पर श्रीनाथ ने दो रन लिए। तीसरी गेंद पर भी श्रीनाथ ने दो रन चुराए। चौथी गेंद पर एक रन आया। अब जीत के लिए दो गेंदों पर 3 रन कि ज़रूरत थी। सक़लैन ने कानितकर के पैरों के पास गेंद फेकी कानितकर ने बल्ला घुमाया और मिड-विकेट पर शानदार चौका जड़कर पाकिस्तान की मुट्ठी से जीत छीन ली। पूरा स्टेडियम में तिरंगे ही तिरंगे दिख रहे थे और साथी खिलाड़ी ऋषिकेष कानितकर को जमकर शाबाशी दे रहे थे।।बता दें कि ऋषिकेष कानितकर ने 2 टेस्ट मैचों में 74 रन बनाए थे। वहीं बात अगर 34 वनडे की करें तो उन्होंने एक अर्धशतक की मदद से 339 रन बनाने के अलावा 17 विकेट चटकाए। सन् 1997 में वनडे मैच के साथ अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले कानितकर ने अपना आखिरी मैच 2000 में खेला था।