कहावत- कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली… में गंगू तेली कौन है? जानकर हैरान रह जाओगे आप

कई बार लोग किसी पर तंज कसने के लिए एक कहावत का प्रयोग करते हैं- कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली, लेकिन अगर किसी से पूछा जाये कि इसमें गंगू तेली कौन है तो शायद ही आपको जवाब मिल पाए, हाँ राजा भोज के बारे तो लगभग सभी लोग जानते होंगे, तो आज हम इस कहावत की शुरुआत और इसमें शामिल गंगू तेली के बारे में बताने वाले हैं।
राजा भोज मध्य भारत के प्रतापी राजा थे, राजा भोज को शास्त्रों का ज्ञाता कहा जाता था, उन्होंने कई विषयों पर कई ग्रन्थ भी लिखे, उन्होंने अपने शासनकाल में कई मंदिर और कई इमारतों का निर्माण कराया था, वे प्रजा के प्रिय शासक थे, उनकी सेना भी विशाल थी, और उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी।
अब बात करते हैं गंगू तेली की, इतिहास्कातों के अनुसार गंगू तेली कोई एक व्यक्ति नही बल्कि 2 अलग अलग व्यक्ति थे, जो दक्षिण भारत के राजा थे, गंगू का पूरा नाम कलचुरी नरेश गांगेय था, जबकि तेली का नाम चालुक्य नरेश तैलंग था, एक बार इन दोनों ने मिलकर राजा भोज के राज्य में आक्रमण कर दिया।
ये दोनों राजा बहुत विशाल सेना लेकर आये थे, जिससे मुकाबला करने के लिए राजा भोज अपनी बहुत छोटी सी सेना लेकर गये और उन दोनों को धूल चटा दी, जिसके बाद राजा भोज के राज्य के लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि कहाँ राजा भोज कहाँ गांगेय तैलम, धीरे धीरे ये कहावत बन गयी और नाम बिगड़ते बिगड़ते कहाँ राजाभोज कहां गंगू तेली चलन में हो गया।