किन्नरों की शादी से जुड़े कुछ अद्भुत तथ्य, जिन्हें जानकर हैरान रह जाओगे आप!

ट्रैन आदि में तालियां बजाने वाले किन्नर या हिजड़ो आदि को तो आप बखूबी जानते होंगे। इनके हुलिए से ही पता लग जाता है कि यह किन्नर है। वर्तमान समाज मे इन्हें बहुत ही नीची नजर से देखा जाता है। लेकिन इसी बीच कई लोग इनके बारे में काफी अच्छी सोच भी रखते हैं।

अकसर किन्नर लोगों को आपने भीड़ वाले स्थानों पर पैसा मांगते हुए देखा होगा। कई लोग इन्हें पैसा देने से कतराते है तो कई लोग इनकी बददुआ से बचने के लिए पैसे दे देते है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इनकी बद्दुआ से किसी का क्या बुरा। होगा और ये लोग आखिर आते कहाँ से हैं?

तो आइए जानते है किन्नरों से जुड़े कुछ अद्भुत और रोचक तथ्य…

शास्त्रों के मुताबिक जब महिला में गर्भाधान के समय रक्त और वुरी कि मात्र बराबर होती है तो ऐसी अवस्था मे पैदा होने वाला नवजात किन्नर पैदा होता है।

माना जाता है कि किन्नर की दुआ किसी का भी भाग्य बदल। सकती है। धन लाभ चाहने वाले लोग किन्नर से लिया हुआ पैसा हमेशा अपने पर्स में रखते हैं।

किन्नरों का एक घिनोना कृत्य यह भी है कि वो हमेशा खूबसूरत और कोमल दिखने वाले लड़कों की तलाश में रहते हैं। ऐसे में किन्नर उनसे दोस्ती करके नजदीकियां बढ़ाते हैं। और मौका पाकर उस लड़के का गुप्तांग काटकर उसे अपने जैसा ही अर्थात किन्नर बना लेते है।

शास्त्रों के अनुसार अगर किसी की कुंडली मे शुक्र, शनि, बुध या केतु का दोष है तो ऐसे में वो इंसान नपुंसक हो जाता है।

प्राचीन समय से चली आ रही गुरु शिष्य की पृथा आज भी किन्नर समाज मे प्रचलित है। मंगलमुखी कहे जाने वाले यह किन्नर सिर्फ मांगलिक कार्यों में ही शरीक होते हैं।

किन्नर समाज मे हर किन्नर की शादी हर साल उनके आराध्य देव अरावन के साथ करवाई जाती है।

जानिए किन्नरों के आराध्य देव अरावन के बारे में
महाभारत में वर्णित जानकारी के मुताबिक अर्जुन और द्रौपदी के पुत्र का नाम अरावन था। पांडवों के किसी युद्ध मे जीत के लिए मा काली के समक्ष नर बलि का आयोजन किया। ऐसे में जब नर बलि के लिए कोई भी आगे नहीं आया तो अर्जुन का पुत्र अरावन खुद को नरबलि के लिए पेश करता है। लेकिन अरावन शर्त रखता है कि वो अविवाहित नहीं मरना चाहता। ऐसे में समस्या यह थी कि अब अरावन के साथ कौन अपनी बेटी की शादी करेगा जो अगले ही पल विधवा हो जाएगी।

इसी समस्या को हल करने के लिए श्री कृष्ण मोहिनी के रूप में आकर अरावन से शादी करते है और इसके तुरंत बाद अरावन की नरबलि दे दी जाती है। इसके बाद श्रीकृष्ण पुनः अपने वास्तविक रूप में आ जाते हैं। इसी धारणा के चलते किन्नर हर साल आराध्य देव अरावन के साथ एक रात के लिए ही शादी करते है।

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