गिरफ्तार डीएसपी ने कबूला – हिजबूल आतंकियों को दिल्ली पहुंचाने के लिए मिले थे 12 लाख

श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किए गए पुलिस उपाधीक्षक देविन्दर सिंह ने कबूल किया कि उसने आतंकियों को जम्मू और उसके बाद चंडीगढ़ पहुंचाने के लिए 12 लाख रुपये मिले थे।पुलिस के बहुचर्चित अधिकारी देविन्दर सिंह जिन्होंने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाइजैक विरोधी टीम का नेतृत्व किया था, को दिल्ली जाने के रास्ते में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान हिजबुल के दो शीर्ष कमांडर नावेद बाबा और आसिफ उनके साथ थे और उनके पास से हथियार एवं गोला-बारूद भी बरामद किया गया था।आईजी (कश्मीर) विजय कुमार ने मीडिया को सोमवार को बताया कि आतंकवादियों ने गणतंत्र दिवस पर हमले करने की योजना बनाई थी। इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में देविन्दर ने खुलासा किया कि उन्होंने आतंकियों को श्रीनगर स्थित अपने इंदिरा नगर वाले घर में पनाह दी थी। यह घर आर्मी के 15 कॉर्प्स हेडक्वार्टर के बगल में है। इसके बाद एक मारुति कार में वे आतंकियों के साथ जम्मू के लिए निकल गए। गाड़ी हिजबुल का एक सदस्य चला रहा था जो फिलहाल अंडरग्राउंड था।इस बीच सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस मामले को एनआईए को सौंप सकती है ताकि आतंकियों के मंसूबों और देविन्दर के आंतक कनेक्शन का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी पता लग सके कि क्या देविन्दर ने पहले भी आतंकियों की मदद की है या नहीं।सूत्रों का कहना है कि देविन्दर सिंह का जम्मू-कश्मीर पुलिस में अच्छा प्रभाव होने के कारण उसके पास कई गोपनीय जानकारियां रहती थी। इसमें सेना, केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों तथा पुलिस की तैनाती की जानकारी होती थी। सुरक्षा बलों की गतिविधियां एवं तैनाती की सूचना आतंकी हमलों में सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं इसलिए आशंका है कि इस प्रकार की सूचनाएं भी देविन्दर सिंह ने लीक कराई हो सकती हैं।खुफिया सूत्रों के अनुसार पिछले दस सालों के दौरान देविन्दर सिंह की तैनाती और उस दौरान घटी आतंकी घटनाओं की पड़ताल की जाएगी। संसद भवन पर आतंकी हमले के साजिशकर्ता आतंकवादी अफजल गुरू ने 2013 में अपने एक पत्र में दावा किया था कि उसे देविन्दर सिंह ने पकड़ लियाथा और उसे संसद भवन पर हमले की साजिश रचने के लिए दिल्ली जाने को कहा था।तब इस बात को बेबुनियाद माना गया था लेकिन अब इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी। इस जांच के पीछे यह देखना है कि पुलिस महकमे में उसका कोई और साथी तो नहीं है। दूसरे, उसके अन्य संपर्को को तलाश करना है।