ग्रहण और गर्भावस्था से जुड़े मिथ्क, जरूर जान लें वरना बाद में पड़ेगा पछताना

LatestNews1:  आने वाली 5 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण लगने वाला है ऐसे में भारतीय संस्कृति के हिसाब से ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना है जो खगोल के साथ-साथ मनुष्यों पर भी प्रभाव डालती है। लेकिन कई ऐसे मिथ्क हमारी संस्कृति में बना दिए गए हैं जिन्हें हम हमेशा से ही मानते आ रहे हैं हांलाकि आज तक उनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण निकल कर सामने नहीं आया है।

ऐसी ही मान्यताओं में ग्रहण के समय गर्भवती स्त्री को लेकर बनी हुई है आज इन्ही मिथ्कों को दूर करने के लिए हमने आपके लिए यह लेख लिखा है। आइए जानते हैं

वैज्ञानिक आधार पर ग्रहण एक खगोलिय घटना है जो हमेशा से ही घटती आई है और आज के समय में स्त्री और पुरूष कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। काम के सिलसिले में बाहर भी निकलना लाजमी है। अब ऐसे में ग्रहण का नाम लेकर किसी को काम से छुटटी मिलना नामुमकिन है।

ग्रहण के समय में भारतीय संस्कृति के हिसाब से खाने पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को 2 से 3 घंटे से ज्यादा खाली पेट नहीं रखना चाहिए. इससे मां के स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है. साथ ही सोने की मनाही से भी परहेज करना चाहिए. एक गर्भवती महिला के लिए जितना पौष्टिक खाना जरूरी होता है उतनी ही एक अच्छी नींद भी जरूरी है.”

हमें ऐसे मिथकों से बचना चाहिए. हमें अपनी दिनचर्या जारी रखनी चाहिए. खाने पीने से परहेज नहीं करना चाहिए खासकर

हालांकि कुछ शोधों में पाया गया है कि ग्रहण के दौरान इंसानी बर्ताव में कुछ बदलाव हो सकते हैं। मनुष्य के रक्तचाप में कुछ बदलाव हो सकता है लेकिन यह भी अभी तक पूर्ण रूप से साबित नहीं हुआ है।