चीन में कोरोना पर जीत का जश्‍न : कुत्‍ते, बिल्‍ली, खरगोश के खून से घरों की छतें हो गईं लाल

Corona Virus के कहर से दुनिया भले ही जूझ रही हो लेकिन चीन में इस महामारी पर जीत का जश्‍न खरगोश और बत्‍तख का मांस खाकर मनाया गया। यही नहीं एक बार फिर से चीन में चमगादड़ों की बिक्री धड़ल्‍ले से शुरू हो गई है। चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस दुनियाभर में फैला था।ऐसा माना जा रहा है कि पैंगोलिन से चमगादड़ के रास्‍ते कोरोना वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर गया। Daily Mail के मुताबिक शनिवार को चीन में कोरोना वायरस पर जीत का जश्‍न मनाया गया। इस दौरान कुत्‍ते, बिल्‍ली, खरगोश और बत्‍तख के खून से घरों की छतें लाल हो गईं। हर तरफ मरे हुए जानवरों के अवशेष नजर आए। इस जश्‍न के लिए चीन में बेहद गंदे मीट मार्केट को फिर से खोल दिया गया। तीन महीने पहले वुहान में इसी तरह की एक मीट मार्केट से कोरोना वायरस इंसानों में फैल गया।चीन की इस गलती का खामियाजा आज दुनिया के 3 अरब लोग भुगत रहे हैं। इस महामारी से दुनियाभर में अब तक 34 हजार लोग मारे गए हैं और 7 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस से आने वाले समय में लाखों लोग मारे जा सकते हैं।
दक्षिण पश्चिम चीन में गुइलिन इलाके में हजारों लोग मीट मार्केट पहुंच गए और वहां खुले में बिक रहे मांस और जिंदा जानवरों को खरीदा। बाजारों में पिंजड़े में विभिन्‍न प्रजातियों के जानवर रखे गए हैं और उन्‍हें बेचा जा रहा है। चीनी बाजारों में अभी चमगादड़ों को बेचने का सिलसिला जारी है। एक अन्‍य बाजार में चमगादड़, बिच्‍छू और अन्‍य जानवरों को बेच रहे हैं। यह नजारा उस समय देखने को मिला जब चीन ने देशभर में जारी लॉकडाउन हटा लिया है। सरकार लोगों को प्रोत्‍साहित कर रही है कि वे बाजारों में जाएं और रोजमर्रा की तरह से जीवन जीएं ताकि अर्थव्‍यवस्‍था को गति मिले।
गुइलिन इलाके में शनिवार को लोगों की भारी भीड़ थी। वहां पर कुत्‍ते और बिल्‍ली का मांस बेचा जा रहा था। यहां लोगों का मानना है कि कोरोना संकट खत्‍म हो गया है। अब घबराने की जरूरत नहीं है। अब यह केवल दुनिया के अन्‍य देशों की समस्‍या है। चीनी लोग अब कोरोना को लेकर चिंतित नहीं हैं। चीन के बाजारों में बिल्‍कुल उसी तरह से काम हो रहा है जैसे पहले वहां पर होता था। हालांकि अब वहां पर सिक्‍यॉरिटी गार्ड तैनात किए गए हैं ताकि कोई तस्‍वीर न ले सके। अब तक ऐसा वहां पर नहीं होता था।