जनरल मोटर्स के 49 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, 12 सालों में ऑटो सेक्टर की सबसे बड़ी स्ट्राइक

जनरल मोटर्स के 49 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, 12 सालों में ऑटो सेक्टर की सबसे बड़ी स्ट्राइक

बिजनेस डेस्कः दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी General Motors के लिए अचानक मुश्किलों का दौर शुरु हो गया है। जनरल मोटर्स के करीब 49,000 कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। विदेशी मीडिया की रविवार की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के वेतन व शर्तों को लेकर यूनियन के साथ देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी की बातचीत विफल होने के बाद हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया।

इस वार्ता में ये तय किया जाना था कि कंपनी में काम करने वाले कितने कर्मचारियों की नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट को फिर से रेन्यू किया जाएगा। अमेरिका में पिछले 12 सालों में ऑटो सेक्टर में होने वाली ये पहली हड़ताल है।

दिवालिया घोषित होने वाली थी कंपनी
यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स (UAW) के जीएम यूनियन वाइस प्रेसिडेंट टेरी डिटेस ने डेट्रॉयट में बताया, ‘हम जनरल मोटर्स के लिए हर वक्त खड़े रहे हैं, जब कंपनी 2009 में दिवालिया घोषित होने वाली थी। अब हम अपने सदस्यों के साथ एकता और एकजुटता के साथ खड़े हैं।’ कंपनी में काम करने वाले एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि General Motors ने शुक्रवार को डेट्रायट की एक फैक्ट्री में एक नया ऑल-इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक बनाने की पेशकश की थी, जो अगले साल तकरीबन बंद होने की स्थिति में है। कंपनी ने ओहियो के लॉर्ड्सटाउन में एक इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी प्लांट खोलने की भी पेशकश की थी। ये एक ऐसा प्लांट है, जहां पर पहले से ही कारों का निर्माण बंद कर दिया गया है।

300 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था
हड़ताल रविवार की मध्यरात्रि से शुरू हो गई है जोकि जनरल मोटर्स में 2007 के बाद पहली हड़ताल है। पिछली बार दो दिन की हड़ताल से कंपनी को 300 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। GM का अपने वर्कर्स के साथ चार साल का कॉन्‍ट्रैक्‍ट बिना किसी समझौते के खत्‍म हो गया है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ट्वीट कर दोनों पक्षों से मामला सुलझाने को कहा है।

GM ने सालों से अच्‍छा मुनाफा कमाया है, पिछले साल कंपनी को 11.8 बिलियन डॉलर का फायदा हुआ था। कर्मचारी यूनियन के अधिकारी कह रहे हैं कि अब वक्‍त आ गया है कि मुनाफे को कर्मचारियों के बीच बांटा जाए। हालांकि कंपनी ऑटो सेक्‍टर में मंदी की संभावना को देखते हुए कोई बड़ा फैसला करने से कतरा रही है।