जम्मू कश्मीर में नहीं रहेगा विधायक और मुख्यमंत्री का वह रुतबा, जानें- कौन होगा सीएम से भी ऊपर

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री भी होगा और विधायक भी। मंत्रिपरिषद भी होगी। अगर नहीं होगा तो विधायक-मुख्यमंत्री का वह रुतबा व प्रोटोकाल, जो पूर्ण राज्य जम्मू कश्मीर में उन्हें प्राप्त था।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में राज्य विधानसभा होगी। घाटी में हालात पूरी तरह सामान्य होते ही केंद्र सरकार राज्य विधानसभा के गठन को अंतिम रूप देने की कार्ययोजना लागू करेगी। एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र, राज्य, केंद्र शासित राज्यों, अदालतों व अन्य संवैधानिक संस्थानों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों की प्रतिष्ठा और प्रोटोकाल का जो वारंट ऑफ प्रेसिडेंस है, उसके मुताबिक केंद्र शासित जम्मू कश्मीर व केंद्र शासित लद्दाख के उपराज्यपाल को 11वें स्थान पर रखा गया है और केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री प्रोटोकाल वारंट के मुताबिक 15वें स्थान पर रहेंगे। प्रोटोकाल में किसी भी पूर्ण राज्य के राज्यपाल को चौथे नंबर पर रखा गया है। पहले पर राष्ट्रपति, दूसरे पर उपराष्ट्रपति और तीसरे स्थान पर प्रधानमंत्री हैं।

ये होंगें उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से ऊपर 

पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व उपप्रधानमंत्री, भारत के चीफ जस्टिस, लोकसभा स्पीकर, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, पूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, राज्यसभा व लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत रत्न से सम्मानित विशिष्ट नागरिक, राजदूत, सर्वोच्च न्यायालय के जज, केंद्रीय लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य चुनाव अधिकारी, महालेखा नियंत्रक एवं परीक्षक भारत सरकार,पूर्ण राज्यों के उपमुख्यमंत्री, नीति आयोग के सदस्य, अटार्नी जनरल ऑफ इंडिया और कैबिनेट सचिव भी प्रोटोकाल के मामले में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से ऊपर होंगे। मुख्यमंत्री जब भी राज्य से बाहर होंगे तो उन्हें 25वें स्थान के मुताबिक प्रोटोकाल व सुविधाएं मिलेंगी। 

तबादले भी नहीं कर सकेंगे

केंद्र शासित राज्य को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुळ्क्त करने के लिए गत दिनों अभियोजन शाखा को एक अलग प्रशासनिक विंग के रूप में मान्यता दी गई। पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पूरी तरह बंद हो जाएगा, क्योंकि यह फैसला उपराज्यपाल या फिर केंद्रीय गृहमंत्रालय ही अपने स्तर पर लेगा। फारेंसिंक साइंस लेबोरेटरी के दल-बल में भी आवश्यक सुधार के कदम उठाए गए हैं।

पुलिस पर नहीं चलेगा हुक्म

राज्य पुलिस और इससे संबंधित संस्थाएं पूरी तरह से उपराज्यपाल के जरिये केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन रहेंगी। इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और अखिल भारतीय सेवा कैडर की नौकरशाही भी उपराज्यपाल के अधीनस्थ होगी।