जिन कारों को आप चलाते है उन्हें इस तरह से किया जाता है डिज़ाइन, पहले मिट्टी से बनती है कार

जब भी कोई ग्राहक किसी कार को खरीदने जाता है, तब वह कार में जो सबसे पहली चीज देखता है, वह कार का डिज़ाइन होता है। कार का डिज़ाइन एक कार का सबसे अहम हिस्सा होता है जिससे कि वह ग्राहकों को अपनी तरफ़ आकर्षित करती है। जिस कार का डिज़ाइन जितना शानदार होता है उस कार के बिकने या सफल होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है। तो दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको ये बताने वाले ही कि आखिर जिन कारों को आप चलाते है। उन्हें किस तरह से डिज़ाइन किया जाता है।

आज हम आपको टाटा मोटर्स के डिज़ाइन स्टूडियो के अंदर की बाते बताने वाले है। ये वही जगह है जहाँ टाटा मोटर्स की तमाम कारें डिज़ाइन की जाती है। टाटा मोटर्स के डिज़ाइन हेड प्रताप बोस है। टाटा मोटर्स के पास कुल तीन स्टूडियो है। जहाँ उनकी कारें डिज़ाइन की जाती है। पहला स्टूडियो यूनाइटेड किंगडम, दूसरा स्टूडियो इटली और तीसरा स्टूडियो पुणे में है।

इस स्टूडियो में पहले कार को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और फिर कागज पर डिज़ाइन किया जाता है। फिर कागज पर डिज़ाइन किये गए मॉडल को मिट्टी से उसे आकार देने की कोशिश की जाती है। एक बार जब कोई कार मिट्टी से डिज़ाइन हो जाती है तब इनमे छोटी-छोटी चीजे जैसे कि ग्रिल, डोर हैंडल और लाइट को डिज़ाइन किया जाता है। एक कार को हकीकत में बदलने में तकरीबन 48 महीनों का समय लगता है।

तब जाकर कार का प्रोडक्शन शुरू होता है और फिर इन्हें ग्राहकों द्वारा खरीदा जाता है। किसी भी कार को डिज़ाइन करने में करोड़ो रूपये का खर्च होता है। तो दोस्तों एक कार के पीछे इतनी लंबी कहानी होती है।