टाटा मोटर्स का इतिहास: ट्रेन से लेकर ट्रक तक, जानिये कंपनी की पूरी कहानी

टाटा मोटर्स, देश की सबसे बड़ी और पुरानी वाहन निर्माता कंपनियों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते है कि कंपनी अपने शुरूआती दौर में वाहन ही नहीं बनाती थी। आइये जानते है टाटा मोटर्स के इतिहास के बारें में:

टाटा मोटर्स, टाटा ग्रुप का एक हिस्सा है, जिसे 1945 में स्थापित किया गया था। टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने की थी लेकिन जे.आर.डी. टाटा के नेतृत्व में टाटा इंजीनियरिंग व लोकोमोटिव कंपनी (वर्तमान टाटा मोटर्स) की नींव रखीं गयी थी।

कंपनी को जल्द ही ‘टेल्को’ के नाम से जाना जाने लगा। जैसा कि नाम से जाहिर है कंपनी को ऑटोमोबाइल का उत्पादन करना चाहिए लेकिन कंपनी ने 10 साल तक किसी भी वाहन का उत्पादन नहीं किया।

टाटा मोटर्स ने 1954 में जर्मनी की कंपनी डायमलर-बेंज से ट्रक के उत्पादन के लिए हाथ मिलाया। कंपनी ने 1977 में कॉमर्शियल वाहन का उत्पादन शुरु किया तथा सालों तक इस सेगमेंट में राज करने के बाद कंपनी ने 1991 में पैसेंजर वाहन क्षेत्र में घुसने का निर्णय लिया।

टाटा ने साल 1991 में ही अपनी पहली कार टाटा सिएरा को लॉन्च किया, यह भारत में ही डिजाइन व उत्पादन की हुई पहली कार थी। यह एक एसयूवी थी तथा इसमें तीन दरवाजें दिए गए थे।

टाटा सिएरा जल्द ही भारत में सफल मॉडल बन गयी तथा टेल्को इसकी अच्छी बिक्री करने लग गया। कंपनी ने एक नया प्लांट भी स्थापित भी कर लिया व यह देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत ही क्रांतिकारी था।

महत्वपूर्ण घटनाएं

वर्ष 1992-2000

टाटा सिएरा की सफलता के थोड़े समय बाद ही कंपनी ने टाटा एस्टेट को देश में लॉन्च कर दिया है। इस कार में 5 स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स दिया गया था। कंपनी ने इसका उत्पादन 1992 से 2000 तक किया, उसके बाद इसे बंद कर दिया गया।

1993 से कंपनी बस बनाने लग गयी तथा अन्य देशों में अपने वाहन निर्यात करने लग गयी। कंपनी ने 1994 में टाटा सूमो को लॉन्च किया, ग्राहकों को यह कार कुछ खास पसंद नहीं आयी लेकिन सेना को यह वाहन पसंद आ गयी।

जल्द ही टेल्को भारतीय सेना के लिए वाहन बनाने लग गयी। हालांकि कंपनी ने कुछ सालों में कई उतार चढ़ाव देखें लेकिन इसके बाद कंपनी ने मल्टी-यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट में टाटा सफारी को भारत में लॉन्च किया।

1997 में कंपनी भारत की पहली प्राइवेट कंपनी बन गयी जिसने 10,000 करोड़ की बिक्री का आकड़ा छुआ था। इसके एक साल बाद टेल्को की सबसे लोकप्रिय कार टाटा इंडिका को लॉन्च किया गया। इसे भारत का पहला पैसेंजर कार भी कहा जाता है।

शुरू में टाटा इंडिका की बहुत आलोचना की गयी थी लेकिन इसके बेहतरीन माइलेज व दमदार इंजन ने इसे बहुत ही लोकप्रिय बना दिया और जिस वजह से यह अब तक की देश की सबसे अधिक बिकने वाली कार में से एक बन गयी।

वर्ष 2000-2005

इसके बाद कंपनी ने टाटा इंडिका के कई वर्जन लाये तथा लगातार इसे अपडेट करते रहे। टेल्को ने पहले नाम में बदलाव करते हुए टाटा इंजीनियरिंग लिमिटेड रखा तथा अंततः 2003 में टाटा मोटर्स नाम रखा गया। 2005 में कंपनी ने 30 लाख वाहन उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया।

2005-2010

टाटा मोटर्स ने 2006 में मार्कोपोलो के साथ करार कर बसें बनानी शुरू कर दी तथा इसके बाद फोर्ड से बड़ी साझेदारी करके जगुआर व लैंड रोवर का उत्पादन संभालने लग गयी थी।

कुछ समय बाद रतन टाटा के नेतृत्व में कंपनी ने दुनिया की सबसे सस्ती कार टाटा नैनो को लेकर आयी। इसे करीब 1 लाख रुपयें की शुरूआती कीमत पर लाया गया था। शुरू में थोड़ी लोकप्रियता के बाद यह मॉडल असफल हो गयी है।

टाटा मोटर्स वर्तमान में भारत के सबसे बड़े वाहन निर्माता कंपनी में से एक है। कंपनी के दुनिया भर में 66,000 से अधिक कर्मचारी है। कंपनी सालों से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बनी हुई है। जिस वजह से टाटा मोटर्स भारतीय बाजार में बहुत ही मायने रखती है।

टाटा मोटर्स देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बहुत ही मायने रखती है। वर्तमान में कंपनी की पैसेंजर वाहनों की बिक्री में थोड़ी कमी है लेकिन कॉमर्शियल वाहनों में आज भी कंपनी पहले नंबर पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *