नहीं काम आई झप्पी, पहले ही दिन उद्धव को देखने पड़े फडणवीस के कड़े तेवर

नहीं काम आई  झप्पी, पहले ही दिन उद्धव को देखने पड़े फडणवीस के कड़े तेवर

महाराष्ट्र मे नवनिर्वाचित उद्धव सरकार ने शनिवार को पहली परीक्षा बहुमत से पास कर ली है। फ्लोर टेस्ट में उद्धव सरकार के पक्ष में कुल 169 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा, वोटिंग के दौरान कुल 4 विधायक तटस्थ रहे, जबकि एमएनएस ने सरकार के पक्ष में वोट नहीं किया। हालांकि इससे पहले सदन में भाजपा ने सदन में जमकर हंगामा किया।

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत परीक्षण और उद्धव ठाकरे के शपथ को संविधान के खिलाफ बताया। बहुमत परीक्षण के बीच में ही बीजेपी ने वॉक आउट कर दिया। ऐसे में पहले ही दिन उद्धव को फडणवीस के सख्त तेवर देखने पड़े। हालांकि हंगामे के बीच सीएम उद्धव ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गले मिलने के लिए विपक्ष के नेता की कुर्सी के पास गए थे। उद्धव ने फडणवीस को गले लगाया।

सदन की शुरुआत होते ही फडणवीस ने कहा कि वंदे मातरम से सदन की शुरुआत क्यों नहीं हुई। इस पर बीजेपी खेमे से हूटिंग होने लगी। फडणवीस ने कहा कि कभी भी जब फ्लोर टेस्ट होता है तो पहले रेगुलर स्पीकर की नियुक्ति के बाद होता है। इसलिए नियमों को ताक पर रखकर प्रोटेम स्पीकर चुना और फ्लोर टेस्ट कराया। उन्होंने कहा कि जो सभा संविधान के हिसाब से नहीं चलती, उसमें हम शामिल नहीं हो सकते। संविधान के नियमों को उल्लंघन हुआ है, इसलिए राज्यपाल को यह कार्यवाही रद्द करनी चाहिए। हम राज्यपाल के पास जाएंगे और उनको अनियमितता का पत्र देंगे।

फडणवीस ने कहा कि जब तक नए स्पीकर की नियुक्ति नहीं होती तब तक प्रोटेम स्पीकर का रहना जरूरी है। प्रोटेम स्पीकर को क्यों बदला गया। अगर यह वही अधिवेशन चल रहा है तो प्रोटेम स्पीकर क्यों बदला गया। यह गलत है। यह देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ। ऐसा क्या डर था या क्या जरूरत थी कि प्रोटेम स्पीकर बदला गया। स्पीकर के चुनाव से पहले फ्लोर टेस्ट नहीं किया जा सकता। जब तक स्थायी स्पीकर नियुक्त नहीं किया जाता तब तक विश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में भाजपा सदस्यों ने कहा कि दो-दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन नियमों का उल्लंघन है। हालांकि प्रोटेम स्पीकर दिलीप वलसे पाटिल ने भाजपा की आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि विशेष सत्र का आयोजन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।