नाले के पानी से बनाई गई पहली बीयर, आते ही हुई ‘आउट ऑफ स्टॉक’

पू-रेस्ट नाम की बीयर स्वीडन में सीवेज वाटर की रीसाइक्लिंग से तैयार हुई है.

अगर आपसे कहा जाए कि आप जो बीयर पी रहे हैं, वो नाले के पानी से बनी तो आप क्या सोचेंगे? दरअसल, दुनियाभर में पानी का दुरुपयोग किसी से छिपा नहीं है. भारत में तो हालात बहुत खराब हैं. ऐसे में दुनियाभर के विशेषज्ञ पानी के रिसाइकलिंग पर जोर दे रहे हैं. स्वीडन (Sweden) में भी नाले के पानी (Sewage Water) को रिसाइकल करके बीयर तैयार की गई है. इस बीयर को दुनिया की मशहूर बीयर कंपनी कार्ल्सबर्ग, न्यू कार्नेगी ब्रुअरी और IVL स्वीडिश एनवायरमेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है. खास बात ये है कि नाले के पानी से अब तक जितनी भी बीयर तैयार की गई है, उसमें से छह हजार लीटर बाजार में बेची जा चुकी है.

कई प्रक्रियाओं से पानी किया गया शुद्ध

स्वीडिश एक्सपर्ट ने नाले के पानी को साफ करने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजारा. इसके लिए नाजुक झिल्ली के साथ-साथ RO का भी सहारा लिया गया. इसके बाद एक बार और इस पानी को फिल्टर किया गया. पानी को साफ करने के बाद इसे लैब में टेस्ट किया गया और फिर इसे बीयर बनाने वाली कंपनी को दिया गया. तब जाकर इस पानी को हॉट बीयर के रूप में तैयार किया गया.

चार हफ्ते में बनी बीयर की पहली खेप

रिसाइकल पानी कंपनी को दिए जाने के बाद चार हफ्ते में सीवेज वाटर से बनी दुनिया की पहली बीयर तैयार हुई. इस बीयर की इतनी डिमांड हुई की कुछ दिनों में ये आउट ऑफ स्टॉक हो गई. इसके बाद कुछ दिनों उत्पादन भी रोकना पड़ा. दो हफ्ते बाद जब ये बीयर मार्केट में फिर आई, एक बार फिर सारे स्टोर से ये बिक गई. रिसाइकल कंपनी से जुड़े फिल्पसन कहते हैं कि दुनिया में इनोवेशन बेहद जरूरी है. ये एक अच्छा तरीका है और इस आइडिया से खुले दिमाग से इनोवेशन को आगे बढ़ाया जा सकता है.

बीयर का नाम है PU:REST

जिस बीयर को नाले के पानी यानी सीवेज वाटर से तैयार किया गया है, उसका नाम है PU:REST. इस बीयर को इसी साल मई में लॉन्च किया गया था. IVL एक्सपर्ट रुपाली देशमुख के मुताबिक अब तक इस बीयर की 6000 लीटर यूनिट बेची जा चुकी हैं. रुपाली के मुताबिक रिसाइकल बीयर बिल्कुल साफ है. रुपाली कहती हैं कि इसमें सिर्फ एक साइकोलॉजिकल दिक्कत है, जो लोगों को स्वीकार नहीं कर देती कि ये पानी कहां से लिया गया है. उन्होंने ये भी कहा कि IVL बीयर बेचने के बिजनेस में नहीं है. हमारा योगदान सिर्फ इस बात के लिए है कि पानी का रिसाइकल करके हर तरह की चीजों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्लीन वाटर प्रोसेस से जुड़े IVL के प्रोजेक्ट मैनेजर स्टैफेन फिलिप्सन कहते हैं कि, ‘बर्बाद हो चुके पानी को रिसाइकल करके दोबारा पीने लायक बनाने के बाद भी इसे स्वीकार न कर पाने की प्रवृत्ति बेहद ज्यादा है. तकनीकी तौर पर इस पानी को पीने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसे मानसिक तौर पर स्वीकार कराना ज्यादा बड़ा टास्क है.’ स्टैफेन कहते हैं कि इस पानी को बीयर के जरिए उपयोग करने का ख्याल उन्हें करीब डेढ़ साल पहले आया था. कार्ल्सबर्ग कंपनी के लोगों ने इस आइडिया को काफी पसंद किया और वो इसका हिस्सा बनने के लिए राजी हो गए.