निजी स्कूलों की मनमानी, अपने ही अध्यापकों का बिना वेतन दिए दिखाया बाहर का रास्ता

the arbitrariness of private schools

 कोरोना महामारी में निजी स्कूलों के अध्यापकों पर नौकरी की गाज गिरनी शुरु हो गई। हांसी में यदुवंशी शिक्षा निकेतन शिक्षण संस्थान द्वारा 28 अध्यापकों को बैगर वेतन दिए निकाल देने का मामला सामने आया है। नौकरी गंवाने वाले कुछ अध्यापकों ने संस्थान के रवैये के खिलाफ प्रधानमंत्री को भी शिकायत भेज दी है। लेकिन नौकरी गंवा चुके अध्यापकों को अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है और अपनी शिकायत लेकर सरकारी अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।

अध्यापकों ने शिक्षण संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को स्कूल से हटाए गए अध्यापक व अन्य स्टाफ के सदस्य एसडीएम डॉ जितेंद्र सिंह के पास शिकायत लेकर पहुंचे। एसडीएम ने मामले में जांच करवाने का आश्वासन दिया है। नौकरी जाने से परेशान अध्यापकों ने कहा कि वह अपना लंबित वेतन लेकर रहेंगे इसके लिए चाहे उन्हें कोर्ट में ही क्यों ना जाना पड़े।

अध्यापकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें ना ही तो नोटिस दिया गया और पिछले कई महीने का वेतन भी बकाया है। जबकि इस अवधि में उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के जरिये शैक्षणिक कार्य किया है। अब अचानक नौकरी जाने से वह बेरोजगार हो गए हैं व जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि स्कूल द्वारा सीबीएसई के नियम कायदों को भी तोड़ दिया गया है। अध्यापकों ने प्रशासन से भी मामले में संज्ञान लेने की मांग की है।