फिल्म की जगह 2 घंटे बहती नदी देखना पसंद करते हैं, एक्टर होकर खुद को सिर्फ किसान मानते हैं

अर्श से फर्श पर पहुंचने में टाइम नहीं लगता है, इसीलिए किसी भी इंसान को अर्श पर पहुंचकर भोग विलास की दुनिया में खो जाने के साथ अपनी जमीन से जुड़े रहना चाहिए। इस तरह की बातों को बॉलीवुड के कुछ अभिनेता अच्छी तरह समझते हैं। बॉलीवुड में तमाम ऐसे अभिनेता हैं, जो किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पंकज त्रिपाठी भी उन अभिनेताओं की लिस्ट में आते हैं। पंकज त्रिपाठी बहुत डाउन टू अर्थ हैं।

हाल ही में जब पंकज त्रिपाठी ने इंटरव्यू किया तो उनसे पूछा गया कि वह कितनी web-series और फिल्में देख चुके है। इस सवाल के जवाब में पंकज त्रिपाठी ने बताया कि वह फिल्में देखना बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं। वह कहते हैं कि वह एक नींद प्रधान आदमी है यानी उन्हें अपनी नींद से बेहद प्यार है। वह रात में जाग नहीं सकते। वह अपनी नींद पूरी लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दो-तीन घंटे किसी फिल्म को देखने की जगह किसी तालाब, बहती नदी देखना पसंद करते हैं। पंकज त्रिपाठी को प्रकृति से बहुत प्यार है और वह इसके साथ घंटों गुजार सकते हैं, बजाय किसी फिल्म के साथ अपना समय व्यर्थ करने मे।

एक बेहतरीन अभिनेता का ज्यादा फिल्में ना देखना थोड़ा सा अजीब लगता है, लेकिन ऐसा है। पंकज त्रिपाठी का मानना है कि किसी काम को करने के लिए उस काम का संपूर्ण अध्ययन करना जरूरी नहीं है। अपने इंटरव्यू में उन्होंने यह बात भी कही है कि वह जब शूटिंग सेट पर बैठते हैं तो कई क्रू मेंबर्स को उनकी शक्ल देखकर विश्वास नहीं होता कि वह एक्टिंग कर पाएंगे, लेकिन जब वह कैमरे के सामने पहुंचता हैं तो वही लोग उनकी एक्टिंग देखकर चौंक जाते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें, पंकज त्रिपाठी अपने फ्लैट पर खटिया डालकर सोते हैं। उनकी एक तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है जो किसी समय बहुत वायरल हुई थी। वाकई उनके भीतर सादगी की कूट कूट कर भरी है। मुम्बई जैसे चमक दमक वाले शहर में भी उनका जीवनयापन गांव का है।

गौरतलब हो कि पंकज त्रिपाठी को ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाना जाता है। 43 साल के त्रिपाठी जी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘रन’ में एक छोटे से किरदार के जरिए की थी, जिसमें उन्होंने किसी ने नोटिस भी नहीं किया था, लेकिन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उनके पास पैसा गाड़ी बंगला सब कुछ है। फिर भी वह एक आम आदमी की तरह जीते हैं।