बीजेपी सांसद ने कहा- आईटी सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम को बंद किया जाए नहीं तो कैब-रिक्शा वाले बर्बाद हो जाएंगे

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बीजेपी के एक वरिष्ठ सांसद पीसी मोहन ने यह कहकर नए विवाद को जन्म दे दिया है कि आईटी सेक्टर के कर्मचारियों को मिली ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा खत्म कर दी जाए क्योंकि इससे दूसरे सेक्टर के कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। बेंगलुरु सेंट्रल से तीन बार के सांसद मोहन ने कहा है कि देश के आईटी निर्यात में एक तिहाई हिस्सेदारी वाले राज्य को WFH का विकल्प खत्म कर देना चाहिए। 

सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ”टेक कर्मचारियों को WFH विकल्प मिलने की वजह से कई दूसरे सेक्टर जैसे परिवहन कैब्स, रिक्शा चलाने वालों या होटल और रियल स्टेट मेंटिनेंस सेक्टर के कर्मचारियों पर WFH विकल्प का बहुत गंभीर असर पड़ा है। दूसरे सेक्टर सामान्य काम करने लगे हैं तो अर्थव्यवस्था को समान्य बनाने में टेक कर्मी क्यों नहीं योगदान दे सकते हैं? बेंगलुरु जैसे शहरों में टेक वर्कर्स की ओर से किया जाने वाले खर्च से दूसरे सेक्टर चलते हैं और यह ठीक नहीं है कि वे WFH कर रहे हैं।”

मोहन ने कहा कि वह मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से अपील करेंगे कि वह इंडस्ट्री से बात करें, ताकि वे WFH को वापस लें। उन्होंने कहा, ”यदि विमान, ट्रेन और बसें लगभग पूरी क्षमता के साथ दौड़ रही हैं तो आईटी और बीटी वर्कर्स को काम पर लौटने से क्या रोक रहा है? जो भी एहतियात जरूरी है वे लें लेकिन सामान्य काम शुरू करें।”

अधिकतर टेक्नॉलजी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को कम से कम जून अंत तक घर से काम करने की सुविधा दी है। हालांकि, सीनियर आईटी इंडस्ट्री कंसल्टेंट लक्ष्मी विश्वनाथ सांसद की मांग से सहमत नहीं हैं। वह कहते हैं, ”सांसद की मांग ऊटपटांग है। महामारी ने कंपनियों को यह अहसास दिलाया कि कई काम ऑफिस से बाहर रहकर अधिक क्षमता के साथ किए जा सकते हैं। यह इस तरह की मांग है कि हमें कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में मशीनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कुछ कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। अभी भी कंपनियां पूरे कार्यबल को ऑफिस बुलाने पर सावधानी बरतेंगी।”

हालांकि, मोहन ने कहा है कि वह इस मुद्दे को राज्य सरकार के सामने उठाएंगे ताकि वह बड़ी टेक्नॉलजी कंपनियों से बात करें और वर्क फ्रॉम होम का विकल्प खत्म कराया जाए। गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान जहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर काफी बुरा असर पड़ा था तो आईटी सेक्टर के कर्मचारी घर से काम करते रहे।