भारतीय टीम के लिए किसी खलनायक से कम नहीं था ये अंपायर, हार में बदल देता था भारत की जीत

क्रिकेट जगत के खिलाड़ियों के साथ ही क्रिकेट प्रेमी भी अंपायर्स का काफी सम्मान करते हैं लेकिन आज हम आपको क्रिकेट जगत के ऐसे अंपायर के बारे में जो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की नज़र में किसी खलनायक से कम नहीं है. इस अंपायर के गलत फैसलों कारण भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण मैचों में हार का सामना भी करना पड़ा था. ये अंपायर क्रिकेट जगत के सबसे विवादित अंपायर्स में से एक स्टीव बकनर हैं.

स्टीव बकनर अपना फैसला सुनाने में काफी देर लगा देते थे लेकिन उनके फैसला भारतीय टीम के लिए किसी प्रहार से कम नहीं होता था. इसी कारण से स्टीव बकनर को ‘स्लो डेथ’ यानि ‘धीमी मौत’ का नाम भी दिया गया था. तो आइए देखे इनके कुछ गलत फैसले जो कुछ इस प्रकार से है…

पहला वाक्या साल 2003 का है। भारत के ऑस्ट्रेलिया टूर के पहले टेस्ट मैच में जेसन गिलेस्पी की गेंद जो लेंथ गेंद थी वो जाकर सचिन के पैड से टकराई। गिलेस्पी ने अपील की और स्टीव बकनर ने बिना सोचे समझे सचिन को आउट दे दिया बल्कि ये गेंद किसी भी तरह से स्टंप पर नहीं जा रही थी। बकनर के इस निर्णय ने स्टेडियम व टीवी में क्रिकेट देख रहे करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैन्स को निराश कर दिया। सचिन इस मैच में शून्य पर आउट हो गए थे।

दूसरा – साल 2005 में अफ्रीका के दौरे पर जब वीरेंद्र सहवाग काफी अच्छी फॉर्म में चल रहे थे तो उन्होंने अफ्रीका के गेंदबाज़ की एलबीडब्ल्यू की अपील पर सहवाग को आउट करार दे दिया जबकि वह साफ-साफ नॉट आउट ही प्रतीत हो रहे थे.

तीसरा – यह बात तब की है जब बकनर अपने 100वें टेस्ट में अंपायरिंग कर रहे थे और ये मैच भारत और पाकिस्तान के बीच कोलकाता में खेला जा रहा था। सचिन 52 रनों पर खेल रहे थे। इसी बीच अब्दुल रज्जाक की गेंद जो ऑफ स्टंप के बाहर जा रही थी उस पर सचिन बुरी तरह से बीट हुए। चूंकि ये साफ पता चल रहा था कि उनके बल्ले का बाहरी किनारा नहीं लगा है, लेकिन बकनर ने उन्हें आनन-फानन में आउट दे दिया।

चौथा – स्टीव बकनर अंपायर का एक विवादित फैसला तब आया जब साल 2006 में फिर से वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के महान बल्लेबाज तेंदुलकर को एलबीडब्ल्यू की अपील पर स्टीव बकनर अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया, जिसमें सचिन 12 रन बनाकर आउट हुए थे और इस मैच में वेस्टइंडीज जीत गया था.

पांचवा – यह बात शारजाह की है। सचिन का वह 25वां जन्मदिन था और वह ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए टीम इंडिया को जीत की ओर लिए जा रहे थे। इसी बीच जब वह 134 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर खेल रहे थे तो माइकल कास्प्रोविच की गेंद जो उनके पैड में लगी और वह गेंद जब लगी तब तेंदुलकर का पैड ऑफ स्टंप के बाहर था। लेकिन इसके बावजूद बकनर ने सचिन को आउट दे दिया।

छठा – साल 2008 में बनकर ने भारतीय विश्वकप जिताने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी अपनी अंपायरिंग की खलनायिका को निभाते हुए उन्हें नो बॉल पर आउट करार देकर पवेलियन की राह दिखा दी थी जिससे धोनी उन पर भड़क पड़े थे.

सातवां – 1992 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के खिलाफ एक मैच के दौरान साउथ अफ्रीका के बल्लेबाज जोंटी रोड्स साफ़ तौर पर रन आउट हो गए थे. लेकिन बकनर ने रोड्स को आउट नहीं दिया और न ही रिप्ले के लिए थर्ड अंपायर को रेफर किया. जिसके बाद रोड्स ने 91 रनों की पारी खेलकर साउथ अफ्रीका को जीत दिला दी थी.

आठवां – स्टीव बकनर के एक फैसले से कोलकाता में दंगों का माहौल तैयार हो गया था। 1998-99 में भारत और पाकिस्तान के बीच ईडन गार्डन्स में हुए मैच में सचिन तेंडुलकर रन लेते समय गेंदबाज शोएब अख्तर से टकरा गए थे। इस टक्कर के कारण सचिन सही समय पर क्रीज के अंदर नहीं पहुंच सके थे। पाकिस्तान ने रन आउट की अपील की और थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया। पब्लिक इस बात पर भड़क उठी की बकनर ने यह देखा था कि अख्तर ने जानबूझकर सचिन को रन लेने से रोका है, लेकिन इसके बावजूद बकनर ने फैसला थर्ड अंपायर को रिफर कर दिया।

द्रविड़ की उतारी नकल

खेल में खिलाड़ी एकदूसरे की टांग खिंचाई करें यह तो आमतौर पर देखने को मिल जाता है, लेकिन अंपायर किसी खिलाड़ी को निशाना बनाए, यह बात जरा चौंकाने वाली है।

स्टीव बकनर ने भारतीय खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की नकल उतार कर अंपायर की गरिमा को आहत किया था। 2003 में जिम्बाब्वे के खिलाफ गब्बा में हुए वनडे के दौरान द्रविड़ पर बॉल टेंपरिंग का आरोप लगा था। टॉफी गेंद पर रगड़ने के लिए द्रविड़ पर 50 फीसदी मैच फीस का जुर्माना भी लगा था।

उस मैच के बाद जब द्रविड़ सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में उतरे, तो बकनर ने अपनी सीमाएं लांघते हुए द्रविड़ की नकल उतारी थी। उन्होंने अपनी उंगली को गेंद पर रगड़कर द्रविड़ की ओर इशारा किया था। टीम इंडिया ने बकनर की इस हरकत की शिकायत मैच रैफरी क्लाइव लॉयड को भी की थी।