भारत के इतिहास में जन्मे 6 ऋषि-मुनि, जो अपने महान काम के लिए जाने जाते हैं

प्राचीन भारतीय इतिहास में ऐसे कई उदाहरण है जिस पर हम गर्व महसूस करते हैं प्राचीन समय में भारत के लिखे कई वैज्ञानिक ग्रंथों का उल्लेख इतिहास में मिलता है हालांकि कभी-कभी सही वैज्ञानिक सिद्धांत भी सदियों तक अपनाई नहीं जाते उन्हें खोजने वाले वैज्ञानिक लंबे समय तक गुमनाम और उपेक्षित रहते हैं विज्ञान के इतिहास में इस तरह के उदाहरण मिलते हैं, तो चलिए शुरू करते हैं।

6- महर्षि कणाद
महर्षि कणाद को परमाणु शास्त्र का जनक माना जाता है कणाद परमाणु की अवधारणा के पितामह माने जाते हैं आधुनिक दौड़ में अनुविज्ञानी जॉन डाल्टन के हजारों साल पहले कणाद ने यह बताया था किसी भी फिजिकल मैटर का जन्म छोटी-छोटी परमाणु के मिलने से होता है हालांकि वर्तमान में परमाणु सिद्धांत का जनक “जॉन डाल्टन” को माना जाता है लेकिन उससे भी लगभग 900 साल पहले ऋषि कणाद ने वेदों में सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत की खोज की थी।5- बौधायन
4- आचार्य भास्कराचार्य
3- आर्यभट्ट:-
आर्यभट्ट की गिनती भारत के महानतम खगोल वैज्ञानिकों के रूप में की जाती है उन्होंने उस समय ब्रह्मांड की जानकारी दुनिया के सामने रखी जिस समय दुनिया के लोग ठीक से गिनती गिनना भी नहीं जानते थे आर्यभट्ट उस समय खगोल विज्ञान के प्रकांड पंडित थे हालांकि दुनिया मानती है कि पृथ्वी और सूर्य के सही संबंध के बारे में सबसे पहले बताने वाला इंसान “निकोलस कॉपरनिकस” था लेकिन आर्यभट्ट ने यह बात कॉपरनिकस से हजारों साल पहले बता दी थी।2- आचार्य चाणक्य
1- महर्षि सुश्रुत
सुश्रुत शल्य चिकित्सा के आविष्कारक माने जाते हैं 2600 साल पहले उन्होंने अपने समय के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के साथ प्रसव, मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसे कई प्रकार के जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे आधुनिक विज्ञान केवल 400 साल पहले से ही सर्जरी कर रहा है लेकिन महर्षि सुश्रुत 2600 साल पहले ही कर दिखाया था।