महाराष्ट्र के दोनों सदनों में सावरकर के सम्मान की मांग नामंजूर. भाजपा ने की शिवसेना की आलोचना

 स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को सम्मान देने का प्रस्ताव लाने की मांग बुधवार को महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों विधानसभा और विधानपरिषद में नामंजूर कर दी गई। भाजपा ने इस आशय का प्रस्ताव लाने की मांग की थी। मांग नामंजूर होने के बाद विधानसभा में जमकर हंगामा भी हुआ।वीर सावरकर के नाम से मशहूर विनायक दामोदर सावरकर की बुधवार को 54वीं पुण्यतिथि थी। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री और अब नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने विधानसभा में मांग रखी कि शिवसेनानीत महाविकास आघाड़ी सरकार स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर के योगदान पर चर्चा और उनके सम्मान का प्रस्ताव लाए। भाजपा द्वारा उठाई गई इस मांग के समय मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे सदन में मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में मोर्चा संभालते हुए उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजीत पवार ने फड़नवीस की मांग पर भाजपा को ही निशाने पर ले लिया। अजीत पवार ने कहा कि जब फड़नवीस खुद मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने दो बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने पहली बार 20 अगस्त, 2018 को और दूसरी बार 17 जनवरी, 2019 को पत्र लिखा था। उस समय केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की ही सरकारें थीं।अजीत पवार ने सवाल किया कि मोदी छह साल से केंद्र की सत्ता में हैं और फड़नवीस भी पांच साल सत्ता में रहकर गए। इसके बावजूद सावरकर को यह सम्मान देने में देर क्यों हुई? अजीत पवार द्वारा जवाब दिए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष पटोले ने भाजपा द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव नामंजूर कर दिया।माना जा रहा है कि 30 साल भाजपा के सहयोगी के रूप में सावरकर के पक्ष में खड़ी दिखाई देने वाली शिवसेना अब सावरकर के मुद्दे पर अपनी सरकार को किसी संकट में नहीं डालना चाहती। चूंकि भाजपा 15 दिन पहले ही सावरकर की पुण्यतिथि के दिन उन्हें सम्मानित करने की मांग का प्रस्ताव लाने की सूचना दे चुकी थी इसलिए बुधवार को बड़ी चतुराई से उद्धव ठाकरे ने सदन से दूरी बनाकर रखी और भाजपा को जवाब देने की जिम्मेदारी राकांपा के अजीत पवार ने संभाली।फड़नवीस ने की शिवसेना की आलोचनाप्रस्ताव लाने की मांग खारिज होने के बाद नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए उसे सत्ता के लालच में ‘लाचार’ कर दिया। फड़नवीस ने कहा, ‘सावरकर को स्वातंत्र्यवीर के स्थान पर माफीवीर बताने के लिए भाजपा कांग्रेस की पत्रिका शिदोरी पर प्रतिबंध की मांग करती है।’उन्होंने कहा कि इस पत्रिका ने आपत्तिजनक सामग्री भी छापी थी जिसमें कहा गया था कि सावरकर को दुष्कर्म के लिए दंडित किया गया था। इससे पहले फड़नवीस ने विरोधस्वरूप विधानसभा में कांग्रेसी पत्रिका की प्रति भी फाड़ दी। इस मौके पर उन्होंने शिवसेना संस्थापक दिवंगत बाला साहब ठाकरे को याद किया कि किस तरह उन्होंने सावरकर का अपमान करने पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की तस्वीर वाले बैनर पर जूते मारे थे।