मुंबई के स्लम का जयकुमार अमेरिका में साइंटिस्ट बना, जो मुंह मोड़ते थे, अब रिश्ते जोड़ रहे

कहते हैं जब इंसान का बुरा समय होता है, तो अपने साथ छोड़ देते हैं। और जब अच्छा समय आता है, तो हर कोई रिश्ता जोड़ने लगता है। ऐसा ही हुआ मुंबई के जयकुमार वैद्य के साथ। 25 साल के जयकुमार आज अमेरिका में साइंटिस्ट हैं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन स्लम एरिया में संघर्ष करते हुए बीता।

उन्होंने बताया कि पिता से अलग होकर मां मायके में रहती थी। वहीं जय का जन्म हुआ। उनकी काेई अामदनी नहीं थी। दोनों मामा-मामी ने मां-नानी की मदद बंद कर दी। 2003 में नानी की तबीयत खराब होने और मामा द्वारा मारपीट किए जाने से मां-नानी और वह पास के ही चॉल में जाकर छोटे से कमरे में रहने लगे। इस बीच, नानी गुजर गई। फीस जमा न होने से उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। तब उन्होंने टीवी रिपेयरिंग दुकान में काम शुरू किया। पढ़ाई भी जारी रखी। जैसे-तैसे फीस का इंतजाम कर इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन मिल गया। वह रोबोटिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स भी बनाता था, जिसमें 3 नेशनल और 4 स्टेट लेवल अवार्ड जीते थे।

इससे जयकुमार को एक कंपनी में इंटर्नशिप मिल गई। 2016 में वे रिसर्च फेलो बन गए। इस दौरान इंटरनेशनल जरनल में दो साइंटिफिक पेपर पब्लिश हुए, जिससे अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया ने उन्हें नैनो टेक्नोलॉजी पर रिसर्च के लिए 17 लाख रुपए सालाना पैकेज पर बुला लिया। वह वहां रिसर्च के साथ पीएचडी भी कर रहे हैं। जयकुमार के मुताबिक बचपन में जो रिश्तेदार मुंह मोड़ते थे। आज वे उन्हें फोन करके अपना रिश्तेदार बताते हैं।