मुझे इश्क़ है तेरी रूह से जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं – प्यार भरी शायरी”

“दिल के लुट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं;

यह तमाशा सरे बाजार ज़रूरी तो नहीं;

मुझे इश्क़ है तेरी रूह से;

जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं।

“जब तक तुम्हें न देखूं!

दिल को करार नहीं आता!

अगर किसी गैर के साथ देखूं!

तो फिर सहा नहीं जाता!

“ख़ुशी से दिल को आबाद करना;

ग़म को दिल से आज़ाद करना;

बस इतनी गुज़ारिश है आपसे कि;

हो सके तो कभी हमें भी याद जरुर करना।