मेन्स के वक्त हुआ वायरल, तैयारी पर था यकीन, बिना कोचिंग बनीं टॉपर

बिना कोचिंग सिर्फ टेस्ट सीरीज की मदद से दिल्ली की लॉ स्टूडेंट सौम्या शर्मा का मुसीबतें पीछा नहीं छोड़ रही थीं. 16 की उम्र में उनकी सुनने की क्षमता चली गई थी. किसी तरह तैयारी करके जनरल कैटेगरी से फॉर्म भरा, एग्जाम के दिन ही उन्हें 102 डिग्री वायरल फीवर हो गया. लेकिन, फिर भी अपनी स्ट्रैटजी पर यकीन था, इसलिए परीक्षा नहीं छोड़ी. फिर पहले ही अटेंप्ट में वो नौवीं रैंक से UPSC टॉपर बन गईं. आइए जानें उनकी स्ट्रैटजी.

स्ट्रैटजी 1- यूपीएससी की नोटिफिकेशन जरूर देखें

हर साल एग्जाम से पहले नोटिफिकेशन जारी होते हैं, उसमें सिलेबस से लेकर सब्जेक्ट और एग्जाम के बारे में जानकारी दी जाती है. एक वीडियो इंटरव्यू में उन्होंने स्ट्रैटजी के बारे में बताया. पढ़ें-

प्रीलिम्स की तैयारी के लिए ये करें

ये एमसीक्यू फार्मेट में आता है, इसमें दो पेपर होते हैं एक जीएस और दूसरा सीसैट. अपने जीएस तैयारी के बारे में वो बताती हैं कि अगर स्ट्रॉन्ग बेस हो तो इसे आराम से निकाल सकते हैं. मेरी स्ट्रैटजी थी कि मैंने कक्षा 6 से 12 की एनसीईआरटी की किताबें पढ़ीं.

सौम्या कहती हैं कि अगर आपका बेस अच्छा नहीं है तो आपको अपनी सिचुएशन के हिसाब से फैसला लेना चाहिए. आप कोचिंग की मदद से कर सकते हैं. इसका दूसरा पेपर सीसैट क्वालीफाइंग नेचर का होता है इसमें 33 प्रतिशत लाने होते हैं. मैंने एसएससी एग्जाम बुक से इसकी तैयारी की थी.

पढ़ती थीं ये दो न्यूजपेपर

सौम्या बताती हैं कि मैं हर दिन दो न्यूजपेपर पढ़ती थी. एक था द हिंदू और दूसरा इंडियन एक्सप्रेस जिससे मुझे मदद मिलती थी. इसके अलावा योजना मैगजीन और कुछ वेबसाइट की मदद से तैयारी की.

मेन्स के लिए जरूरी थी आन्सर राइटिंग

वो कहती हैं कि मेन्स के लिए जरूरी है कि आप आन्सर राइटिंग में परफेक्ट हों. मैंने कोचिंग नहीं ली, टेस्ट सीरीज की मदद से मैंने इसकी तैयारी की. इसमें मैंने सही समय पर सभी सवालों के सटीक जवाब देने की प्रैक्टिस की.

ऑप्शनल पेपर सोचकर चुनें
ऑप्शनल विषय वही चुनें जिसमें आप अच्छे से पढ़ाई कर सकें, आपकी रुचि हो, जिसे आप समय दे सकें. मैंने ऑप्शन में लॉ को चुना था क्योंकि मैं पहले ही पांच साल लॉ पढ़ चुकी थी. इसके अलावा एआरसी रिपोर्ट और अन्य डेटा को पढ़ें और उससे तैयारी करें. निबंध की तैयारी के लिए न्यूजपेपर और मैगजीन पढ़ें और उससे प्रैक्टिस करें.

सौम्या शर्मा बचपन से होनहार स्टूडेंट रही हैं. जब वो 16 साल की थी तो उनकी सुनने की शक्ति चली गई थी. इसके बावजूद उनका फोकस क्लियर था. हियरिंग एड मशीन की मदद से सुन पाती हैं. फिर भी उन्होंने डिसेबल पर्सन की कैटिगरी के बजाय सिविल सर्विस का फॉर्म जनरल कैटिगरी से भरा था. सौम्या को यूपीएससी की परीक्षा के वक्त वायरल फीवर हो गया था फिर भी उन्होंने 102 डिग्री बुखार में यूपीएससी की परीक्षा दी थी. उनके डॉक्टर माता-पिता एग्जाम सेंटर के बाहर उनका इंतजार करते रहे थे.