यहां जाकर एक साल में एक करोड़ कमा सकते हैं बेरोजगार, टैक्स भी कर दिया जाएगा माफ

पूरी दुनिया में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन दुनिया का एक छोटा सा देश ऐसा भी है जो बिना काम किए प्रति साल करोड़ों का भुगतान करने को तैयार है लेकिन इसके लिए उन्हें वह काम करना होगा जिसे करने से भारत में रोका जाता है जबकि वहां लोगों को बुला—बुलाकर कहा जाता है कि उन्हें यह काम कर लेना चाहिए ताकि उन्हें बिना काम किए भुगतान मिल सके।

आश्चर्य मत कीजिए, दुनिया के छोटे से यूरोपीय देश फिनलैंड में आबादी का संकट पैदा हो गया है, इसलिए वहां की सरकार एक बच्चा पैदा करने पर 10 हजार यूरो का भुगतान करने के साथ ही वेतन के साथ बेशुमार छुट्टी, इलाज इत्यादि बिल्कुल फ्री देती है। फ़िनलैंड की सबसे छोटी नगरपालिकाओं में से एक लेस्टिजारवी में बेबी बोनस नाम से एक प्रोत्साहन शुरू किया गया है। यह तय हुआ कि हर बच्चे के जन्म पर अगले 10 साल में 10 हज़ार यूरो दिए जाएंगे। यह उपाय कारगर रहा। योजना शुरू होने के बाद से नगरपालिका में अब तक 60 बच्चे पैदा हो चुके हैं। उससे पहले के 7 साल में सिर्फ़ 38 बच्चों का जन्म हुआ था। करीब 800 लोगों के गांव में इतने नये बच्चों के जन्म से गांव को बढ़ावा मिला है। फ़िनलैंड की कई अन्य नगर पालिकाओं ने भी कुछ सौ यूरो से लेकर 10 हज़ार यूरो तक का बेबी बोनस शुरू किया है। इन स्थानीय प्रोत्साहनों के बावजूद फ़िनलैंड में राष्ट्रीय जन्म दर नहीं बढ़ रही। यूरोप के कई अन्य देशों की तरह पिछले दशक में इसमें बड़ी गिरावट आई है। 2018 में यह दर प्रति महिला 1.4 तक गिर गई। दस साल पहले यह 1.85 थी। फ़िनलैंड में परिवार की मदद के लिए कई कार्यक्रम हैं। जिन परिवारों में बच्चे का जन्म होने वाला हो उसे बेबी बॉक्स स्टार्टर किट दिया जाता है।
प्रति बच्चे हर महीने 100 यूरो की मदद दी जाती है और माता-पिता को 70 फ़ीसदी तनख्वाह के साथ साझे तौर पर 9 महीने तक की छुट्टी मिलती है। फ़िनलैंड में परिवार कल्याण पर यूरोपीय संघ के औसत से ज़्यादा सरकारी पैसा ख़र्च किया जाता है। स्वीडन में बच्चे के माता-पिता को मिलने वाली छुट्टियां ज़्यादा होती हैं। बच्चों के बारे में कुछ लोगों के फ़ैसलों पर पैसे की मदद का सकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन नहीं लगता कि सिर्फ़ यह एक तरीका उनको बच्चे पैदा करने के लिए तैयार करेगा। फ़िनलैंड की खाड़ी के दूसरी तरफ तस्वीर थोड़ी सी अलग है, जहां बाल्टिक देश एस्टोनिया ने पिछले डेढ़ दशक में जन्म दर बढ़ाने में कामयाबी पाई है।

इस बढ़ोतरी का थोड़ा श्रेय सरकारी नीतियों को जाता है जिसके तहत परिवार कल्याण नीतियों में पैसे लगाए गए है। ख़ास तौर पर बड़े परिवारों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाई गई है। 2004 में पारिवारिक छुट्टियों को उदार बनाया गया था जिसके तहत डेढ़ साल तक पूरी तनख्वाह के साथ छुट्टी दी जाती है। 2017 में एस्टोनिया ने बच्चे के लिए मासिक लाभ योजना शुरू की। पहले बच्चे के लिए 60 यूरो, दूसरे बच्चे के लिए 60 यूरो और तीसरे बच्चे के लिए 100 यूरो प्रति माह। सरकार तीन या ज़्यादा बच्चों वाले परिवारों को इनाम देती है। उन्हें प्रति महीने 300 यूरो का मासिक बोनस मिलता है। इस तरह तीन बच्चों वाले एस्टोनियाई परिवार को हर महीने कुल मिलाकर 520 यूरो का पारिवारिक लाभ मिलता है। एस्टोनिया में जीवनयापन का ख़र्च और औसत आमदनी यूरोप के बाकी देशों की अपेक्षा कम है। इसे देखते हुए ये पारिवारिक फायदे निश्चित रूप से उदार वित्तीय मदद हैं। एस्टोनिया की योजना कारगर दिख रही है। 2000 के दशक की शुरुआत में जन्म दर 1.32 थी जो 2018 में 1.67 तक पहुंच गई, हालांकि 2010 के दशक की शुरुआत में इसमें थोड़ी गिरावट भी आई थी। सस्ती सार्वजनिक डे-केयर सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और एस्टोनिया की स्थिर अर्थव्यवस्था भी जन्म दर बढ़ाने में मददगार रही है।
आर्थिक अवसर अच्छे होने पर जन्म दर बढ़ने की संभावना रहती है। जब हालात अच्छे नहीं रहते तो इसका उलटा होता है। दूसरे शब्दों में वित्तीय प्रोत्साहन से जन्म दर बढ़ाए रखने का आधार मिलता है, लेकिन सामान्य आर्थिक कारक भी अहम भूमिका निभाते हैं। फ्रांस में नागरिकों को पता है कि राज्य अपने परिवारों को प्यार करता है और उनको भरोसा रहता है कि सरकार वित्तीय रूप से उनकी मदद करेगी। फ्रांस में पिछले 4 साल में जन्म दर में मामूली गिरावट आई है, फिर भी यूरोपीय संघ के देशों में सबसे ऊंची जन्म दर यहीं है। फ़्रांस को बच्चों के हित वाली स्थायी नीतियों और परिवारों पर अन्य OECD देशों से अधिक सरकारी ख़र्च करने के लिए जाना जाता है।
यह कई तरह की मदद और भत्ते देता है, जिनमें करीब 950 यूरो का “जन्म-अनुदान”, मासिक सहायता और कई पारिवारिक भत्ते शामिल होते हैं। कई भत्ते बच्चों की संख्या बढ़ने पर बढ़ जाते हैं। फ्रांसीसी परिवार को आयकर में छूट भी मिलती है और डे-केयर को सरकारी सब्सिडी दी जाती है। इसके बावजूद टॉलेमॉन यह मानने को राजी नहीं हैं कि फ़्रांस में ऊंची जन्म दर के पीछे वित्तीय प्रोत्साहन का हाथ है। जैसे फ़्रांस में परिवार शुरू करने के पक्ष में और संतानहीनता या एक बच्चे वाले परिवार के ख़िलाफ़ एक मज़बूत, सकारात्मक भावना है। पैसा मददगार हो सकता है, लेकिन जन्म दर में सार्थक बढ़ोतरी सामाजिक नज़रिये, परिवार-समर्थक नीतियों और वित्तीय सहायता के एक जटिल संयोजन का मामला है।

इटली की एक केस स्टडी दिखाती है कि ये कारक मिलकर अंतर ला सकते हैं। इटली में पिछले कई दशकों से जन्म दर नीचे है और इसमें गिरावट हो रही है। 2018 में यह पहली बार 1.3 तक गिर गई। लेकिन इटली के ही एक प्रांत- बोलज़ानो ने इस ट्रेंड को उलट दिया। बोलज़ानो स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया की सीमा पर स्थित है। यहां की जन्म दर 1.67 है जो यूरोपीय संघ के औसत 1.60 से अधिक है। इस प्रांत को दक्षिण टायरॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह स्वायत्त राज्य है और इसे अपनी नीतियां बनाने के लिए अधिक स्वतंत्रता हासिल है। यहां की पारिवारिक नीतियां इटली के अन्य किसी भी जगह के मुकाबले ज़्यादा उदार हैं और परिवार को अधिक वित्तीय सहायता मिलती है। यहां हर महीने लगभग 200 यूरो का प्रोत्साहन मिलता है जो राष्ट्रीय औसत के दोगुने से भी ज़्यादा है। इसके अलावा, कम आय वाले लोगों को विशेष सब्सिडी मिलती है।
इटली में अन्यत्र कहीं भी, दादा-दादी छोटे बच्चों की देख-रेख करने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, लेकिन बोलज़ानो में स्थानीय चाइल्डकेयर सेंटर को ढूंढ़ना आसान है। बोलज़ानो में 20 से 64 साल के बीच की 73 फ़ीसदी महिलाएं कामकाजी हैं। राष्ट्रीय औसत 53 फ़ीसदी का है। दक्षिणी इलाकों में महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी नज़रिया आज भी मौजूद है। बोलज़ानो में नियोक्ता (सरकारी क्षेत्र समेत) लचीले कामकाजी घंटे, पार्ट-टाइम और दूर रहकर काम करने की सुविधा देने की पेशकश करते हैं। इससे महिलाओं के लिए बच्चों का लालन-पालन करते हुए काम करना आसान हो जाता है। यूरोप की आबादी लगातार घटती जा रही है, लेकिन कई गांव और शहर जन्म दर बढ़ाने के अपने कार्यक्रम चला रहे हैं।