रांची में मिली कोरोना की पहली ऐसी पेशेंट, जिसने पूरा मामला ही दिया बदल

पहले स्पष्ट कर दूं कि यह लेख कुछ प्रारम्भिक सूचनाओं पर आधारित है जो कल ही हमारे सामने आई है उनके बारे में जब गहरा अनुसंधान किया जाएगा तब ही कुछ स्पष्ट नतीजे ओर सही तस्वीर उभर कर सामने आएगी……….भारत से ही शुरुआत करते हैं कल कोरोना पॉजिटिव का भारत में ऐसा केस आया है जिसे देखकर चिकित्सक आश्चर्य चकित है, कल दिन भर देश का मीडिया में कुछ विदेशी मुस्लिमो को जो तबलीगी जमात के फंक्शन में शामिल होने आए थे उसे लेकर हल्ला मचता रहा, उन्हें देश के अलग अलग शहरों में पकड़ कर डिटेन किया गया, क्वारंटाइन में रखा गया इसी सिलसिले में राँची में कल मलेशिया से आई 22 वर्षीय युवती को रोक लिया गया ओर सैंपल की जांच की गयी. सैम्पल में महिला कोरोना पॉजिटिव पायी गयी……..लेकिन उसकी हालत देखकर राँची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स सहित स्थानीय चिकित्सक हैरान रह गए क्योकि महिला में इस बीमारी के कोई भी लक्षण नहीं पाये गये.यानी न तो उसके गले मे दर्द था न उसे बुखार था न उसे किसी तरह की सूखी खाँसी थी …….रिम्स के विभागाध्यक्ष डॉ मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने उसके सेंपल की बार बार जांच करवाई है रात में जांच के दौरान कोरोना के स्क्रीनिंग जीन का पता चला. मंगलवार को सुबह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे से मिले कंफर्म किट से दोबारा युवती के सैंपल की जांच की गयी, जिसमें पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई. इसके बाद एनआइवी पुणे से क्रॉस कराया गया. तब जाकर कोरोना की पुष्टि की गई हैडॉ मनोज कुमार ने बताया कि सबसे ज्यादा सतर्कता बरतने की बात यह है कि युवती में कोरोना का कोई लक्षण नहीं मिला है. अक्सर देखा जाता है कि जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है उसको तत्काल लक्षण नहीं मिलता है. ऐसे में यह ध्यान देना होगा कि युवती जिस-जिस व्यक्ति के संपर्क में आयी होगी उसको क्वारेंटाइन में रहना होगा………..यह डरने की भी बात है! घबराने की भी बात है लेकिन वही दूसरी तरफ यह उम्मीद भी जगाती है कि रोग से हम आसानी से बच जाएंगे………यहा यह भी सोचने में आता है कि क्या एक मरीज के मिलने से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है, लेकिन कल कोरोना के बारे में एक ओर बड़ी आश्चर्यजनक सूचना चीन से आई……. कल चीन ने विश्व के सामने यह पहली बार स्वीकार किया कि चीन ने कहा है कि उसके यहां कोरोना से संक्रमित 1541 ऐसे केस हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे हैं………इससे भी बड़ा धमाका चीन ने तब किया जब उसने बताया कि वह बिना लक्षण वाले मरीजों को कोरोना वायरस के मामलों में शामिल ही नहीं करता है. अगर किसी में कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण नजर नहीं आता है और वह टेस्ट में पॉजिटिव आता है तो चीन उसे कन्फर्म केस नहीं मानता………इस बात की शेष विश्व ने कड़ी आलोचना की हैशायद यहा पर चीन के अब सब कुछ नॉर्मल हो जाने असलियत सामने आ जाती है चीन में शायद आज भी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव लोगो की संख्या मौजूद है लेकिन उनके ऐसे लक्षण नही है जो कोरोना पॉजिटिव के लक्षण बताए जाते हैं, ओर न ही उससे बड़ी संख्या में अब मौतें हो रही है इसलिए वहा अब सब कुछ खुल जाने की बात कही जा रही है…………चिकित्सक इस बात को शुरू से स्वीकार कर रहे है कि कोरोना से पीड़ित 80 प्रतिशत व्यक्ति बिना हॉस्पिटल में इलाज के घर पर ही साधारण फ्लू की दवाइयों से ठीक हो जाता है…………. तो क्या यह माना जाए कि कोरोना दरअसल उतना खतरनाक नही है जितना बताया जा रहा है?बहुत से लोग इस बात में विश्वास कर रहे हैं कि कोरोना के खतरे को मीडिया बढ़ा चढ़ा कर बतला रहा है…… मित्र अजित साहनी ने इस बारे बताया भी था कि इटली से एक रिपोर्ट भी आई है जिसमे ये कहा गया कि इटली में इस दौरान के जितनी मौतें हुईं हैं , उसमें सरकार ने मृत्यु प्रमाण पत्र में सिर्फ 12% लोगों को ही कोरोना के कारण से मृत्यु हुई दर्शाया है , 88% विभिन्न कारणों से मरे हैं financial times ने यह बात छापी हैं, मित्र अजित साहनी एक ओर बात कह रहे हैं कि ‘पूरी दुनिया में वायरस इंफेक्शन , इन्फ्लूएंजा , जो सीधे श्वसन तंत्र पर हमला करता है ,उससे रोज़ 1800 लोग मरते हैं , यह उनका नही WHO का कहना है WHO यह बात तीन साल पहले ही बता चुका हैतो क्या यह घबराने की बिल्कुल बात नही है? लेकिन दुनिया भर में इस बात से पैनिक मचा हुआ है!……जहां तक मेरा सोचना है सच इन दोनों के कही बीच मे है……….
यह बात बिल्कुल ठीक है कि कोविड -19 कोरोना वायरस श्रृंखला का एक नया वायरस है इसमे लोगों को संक्रमित कर देने की भयंकर ताकत मौजूद है इटली जैसे यूरोप के देशों में , अमेरिका में चीन में ईरान आदि एशियाई देशों में बड़ी तेजी के साथ फैला भी है और लोगो के श्वसन तंत्र को संक्रमित कर रहा है लेकिन यह सोचने की बात यह है कि यह उस तरह के लोग है जो बड़े हाइजीनिक ढंग से जी रहे थे खास बात यह भी है कि मरने वाले 80 प्रतिशत से अधिक लोग 55 साल की आयु से अधिक है और अन्य व्याधियों से ग्रस्त है …….. ऐसा कही देखने मे नही आया है कि कोई बिल्कुल स्वस्थ आदमी हो अचानक वह कोरोना की चपेट में आया हो ओर उसकी मृत्यु हो गयी हो ( आपके पास ऐसी कोई घटना की खबर हो तो कृपया बताएं )इन प्रारम्भिक जानकारियों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कोविड – 19 वायरस ठीक उसी थ्योरी पर काम कर रहा है जो एवोल्यूशन यानी विकास वाद का आधारभूत सिद्धांत है और वो थ्योरी है सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट…… आपको जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि मूल रूप से यह वाक्यांश हर्बर्ट स्पेंसर ने अपनी किताब ‘प्रिंसिपल ऑफ बायोलॉजी” में लिखा था जिसे बाद में डार्विन ने अडॉप्ट कर लिया, हिंदी में इसका सही अनुवाद है ‘स्वस्थतम की उत्तरजीविता’……………