राकेश टिकैत ने कहा- 4-5 दिन में मामला सुलझा नहीं तो पूरे एक वर्ष तक जाएगा

 कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की बॉर्डर पर धरना दे रहे अन्नदाताओं को दो माह से ज्यादा का समय बीत चूका है। केंद्र सरकार निरंतर चर्चा के रास्ते खुले होने की बात कह रही है, किन्तु दिल्ली की बॉर्डर पर बहुत ही सख्त सुरक्षा भी की जा रही है। दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर पुलिस द्वारा बाड़ेबंदी की गई है, जहां बैरिकेडिंग लगाई गई है तथा साथ-साथ कीलें भी लगा दी गई हैं। वही इस सब के बीच किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि वो नंबर उन्हें चाहिए जिसपर सरकार ने कहा है कि वो एक फोन कॉल ही दूर हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि जब वो पहले दिल्ली जा रहे थे, तब भी मार्गों में कीले लगाई गई थीं। अब हमें दिल्ली जाना ही नहीं है, तो फिर कील क्यों लगा रहे हैं इससे नागरिकों को समस्यां होगी।

भाकियू के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जितने नागरिक के मार्ग बंद होंगे, उतना ही जनता को पता लगेगा कि कौन किसके लिए कील लगा रहा है। ये रोटी को संदूक में बंद करने का षड्यंत्र है, ये लोग भी जान चुके है। राकेश टिकैत ने कहा कि 6 फरवरी को जो बंद किया जाएगा, उसमें पब्लिक को परेशान नहीं किया जाएगा। 

किसानों की महापंचायत में निरंतर नेताओं के प्रवेश पर राकेश टिकैत ने कहा कि ये तो मेला है, जहां हर कोई आ रहा है। किन्तु कोई यहां पर आकर वोट तो नहीं मांग रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तो अब अक्टूबर-नवंबर तक जाएगा क्योंकि एक कहावत है कि जो मेले में खोता है वह मेले में ही मिलता है,  तो 4-5 दिन में केस सुलझा नहीं तो पूरे एक वर्ष तक जाएगा।