राजस्थान के मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी खबर, ग्राहकों को झटका देकर भाग गई कंपनियां, होना पड़ रहा परेशान

राजस्थान के मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी खबर, ग्राहकों को झटका देकर भाग गई कंपनियां, होना पड़ रहा परेशान
महंगे स्मार्ट फोन के गिरकर टूटने, पानी में गिरने या चोरी होने के डर से ग्राहकों से मोबाइल बीमा के नाम से करोड़ों रुपया हड़प लिया गया है।यही नहीं जिन बीमा कम्पनियों के जरिए बीमा हुआ उनके एजेंट भी गायब हो गए हैं। रिटेल व्यापारियों के अनुसार अकेले अलवर जिले में हर माह करीब औसतन 6 हजार मोबाइल का बीमा होता रहा है। 
जिसका बीमा प्रीमियम करीब 72 लाख रुपए कम्पनियों तक पहुंचता है। पूरे प्रदेश में प्रति माह करीब 1 लाख 80 हजार मोबाइल के बीमा होते हैं। जिसके एवज में कम्पनियों के पास 21 करोड़ रुपए बीमा प्रीमियम का जमा होता है। लेकिन 2018 के बाद मोबाइल का बीमा करने वाली प्रमुख कम्पनियों के एजेंट बाजार से गायब हो गए हैं। अब उपभोक्ता न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं।55 हजार का आईफोन लियाअलवर शहर के स्कीम दो निवासी राजेश गाबा ने रोड नम्बर दो से 2015 में करीब 55 हजार रुपए का आईफोन लिया। दुकान पर ही 35 सौ रुपए देकर एप्स यूनिट से बीमा कराया। अब कम्पनी के एजेंट ही नहीं है। मजबूरी में कोर्ट पहुंचे हैं।स्कीम दो निवासी रवि ने 2017 में 25 हजार रुपए का मोबाइल खरीदा। 1500 रुपए देकर सिस्का नाम की कम्पनी से बीमा कराया। मोबाइल चोरी हो गया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद भी कम्पनी ने अब तक क्लेम नहीं दिया है। कम्पनी के एजेंट का भी अता-पता नहीं है।सैकड़ों दुकानों से वापस लौट गएजिले में हर साल सैकड़ों उपभोक्ता हैं जिनके मोबाइल टूटने, पानी में जाने या चोरी होने के बाद बीमा कम्पनी के एजेंट के पास आते हैं। अब दुकानों पर एजेंट नहीं है। जिनके जरिए बीमा कराया। क्लेम नहीं मिलने पर मुश्किल से दो प्रतिशत ग्राहक ही न्यायालय में पहुंचते हैं।एक नजर मोबाइल बीमा व बाजार परअलवर जिले में हर माह करीब 30 करोड़ रुपए का मोबाइल बाजार है। औसतन 16 हजार से अधिक मोबाइल प्रतिमाह बिकते हैं। जिनकी औसत कीमत करीब 10 से 12 हजार रुपए होती है। 2014 से 2017 तक करीब 35 से 40 प्रतिशत ग्राहक अपने मोबाइल का बीमा कराते थे लेकिन अब एजेंटों के भाग जाने से बीमा कराने वालों का आंकड़ा 5 से 10 प्रतिशत रह गया है।हमने तो बीच में ही छोड़ दियासोसाटियों की तरह मोबाइल बीमा में भी गड़बड़ी हुई हैं। इस कारण हमने तो कुछ महीने ही कार्य किया। उसके बाद छोड़ दिया। अब कम्पनी के एजेंट ही गायब हो गए। 
मुकेश तायल, बीमा कम्पनी वितरकभाग गए एजेंटपहले जो एजेंट मोबाइल दुकानों पर आकर बीमा करते थे। अब गायब हैं। ग्राहक भटकते हैं। काफी संख्या में उपभोक्ता न्यायालय पहुंच गए हैं। एक मोबाइल का औसतन 12 सौ रुपए में बीमा हुआ है। करोड़ों रुपए का हेरफेर है। 
नरेश तख्तानी, मोबाइल व्यापारी