राजस्थान में किसान ने उगाई ऐसी फसल, हो गया मालामाल, किसान भाइयों को जरूर देखनी चाहिए

भीलवाड़ा/बीगोद। आमतौर पर ठंडे प्रदेश कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, शिमला में होने वाली स्ट्राबेरी ( Strawberry ) की खेती अब राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ में भी होने लगी है। यहां के किसानों का रुझान स्ट्राबेरी की ओर बढ़ता जा रहा है। मांडलगढ़ के बीगोद, कल्याणपुरा और नन्दराय गांव में भी किसान स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं। स्ट्राबेरी खेती से किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे है।

ऐसे होती है खेती ( Strawberry Farming )
स्ट्रॉबेरी के पौध को ड्रिप व मल्चिंग पर उगाया जाता है। इसकी रोपाई सिम्बर-अक्टूबर में की जाती है। यह दिसम्बर से मार्च के अंत तक फल देता है।

इतने का आता है एक पौधा
स्टॉबेरी का प्रति पौधा 10 से 15 रुपए के बीच पड़ता है। किसान बंशीलाल धाकड़ ने बताया कि एक एकड़ में 23 हजार पौधे लगाएं है। क्वालिटी भी अच्छी है और उत्पादन भी हो रहा है। अभी दिल्ली मंडी में फल भेजा जा रहा है जहां 2 सौ रुपए किलो का भाव मिला रहा है। यह नाजुक फल होने से इसे अच्छे से पैकिंग करना पड़ता है।

प्रतिकूल मौसम में भी की खेती
सहायक कृषि अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि स्ट्रॅाबेरी की फसल केवल ठंडे प्रदेश में ही होती है। इसके बावजूद मांडलगढ़ में किसान इसकी खेती कर रहे हैं। इसके सफल परिणाम भी मिले हैं। यहां अच्छे मीठे फल उग आए हैं। यह प्रयोग अन्य किसानों को भी करना चाहिए।