राजस्थान: 72 साल बाद कुछ ऐसे मिले भाई-बहन, बिछड़ कर पाकिस्तान चला गया था आधा परिवार

राजस्थान: 72 साल बाद कुछ ऐसे मिले भाई-बहन, बिछड़ कर पाकिस्तान चला गया था आधा परिवार

रणजीतसिंह अब पाकिस्तान में रह रही अपनी बहन को पाकर बहुत खुश हैं.

कश्मीर रियासत में मुजफराबाद के दुदरवैना गांव के रहने वाले लम्बरदार मतवालसिंह का परिवार उस समय बेघर हो गया, जब 1947 में कबायली हमला हुआ था.

अक्सर भाई बहनों या परिवारों के बिछड़ने और मिलने के दृश्य आपने फिल्मों में देखे होंगे, लेकिन ऐसा ही एक सीन रियल लाइफ में भी होने की खबर सामने आई है. खबर के मुताबिक 72 साल पहले कश्मीर में 1947 में हुए कबायली हमले में एक परिवार बिछड़ गया था. परिवार के कुछ लोग भारत में रह गए तो कई सदस्य पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन अब यह परिवार सोशल मीडिया के कारण एक हो गया है.

यह सब रायसिंहनगर के रहने वाले कश्मीरी परिवार के एडवोकेट हरपाल सिंह सूदन और पीओके में जुबैर नाम के एक युवक और पुंछ में रहने वाली युवती रोमी शर्मा की बदौलत हुआ. इन्होंने पुंछ में रहने वाले बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाया हुआ है जिसके कारण 72 साल पुहले बिछड़े भाई-बहन का मिलन संभव हो पाया है. वहीं, रायसिंहनगर के रणजीतसिंह अब पाकिस्तान में रह रही अपनी बहन को पाकर बहुत खुश हैं. पाक में रहने वाली उसकी बहन शकीना भी परिवार को पाकर खुश है.

आपको बता दें, कि कश्मीर रियासत में मुजफराबाद के दुदरवैना गांव के रहने वाले लम्बरदार मतवालसिंह का परिवार उस समय बेघर हो गया, जब 1947 में कबायली हमला हुआ. हमले के दौरान मतवालसिंह का परिवार भी अन्य लोगों की तरह वहां से निकला लेकिन उस समय चार साल की उसकी पोती बिछड़ गई. मतवालसिंह का परिवार अब रायसिंहनगर में रहता है. वहीं, हमले के दौरान बिछड़ी बड़ी बहन भज्जो अब पाकिस्तान में रहती है, जिसका नाम शकीना है. शकीना की एक शेख से शादी हो गई थी, शकीना की चार संतान भी हैं.

हरपालसिंह सूदन ने बताया कि करीब 15 दिन पहले रणजीतसिंह बाबा उसके घर आए थे. तब उसने उनसे चर्चा की कि उसने एक व्हाटसअप ग्रुप बनाया हुआ है. तभी, यह बात सुनकर रणजीतसिंह ने 1947 में बिछड़ी अपनी चार साल की बहन भज्जो के बारे में बताया. 

वहीं, इसी ग्रुप में रणजीत सिंह की वीडियो कॉल पर पीओके के एक युवक जुबैर से चर्चा हुई, और पता लगाया कि दुदरवेना में बिछड़ी भज्जो ही शकीना है. अब रणजीत अपनी बहन से मिलने को बेताब हैं. रणजीतसिंह का परिवार अब जल्द करतारपुर जाएगा. वहां भज्जो का परिवार भी आएगा और वहीं इन बिछड़े भाई-बहन का 1947 के बाद मिलन होगा.