वो महारानी, जिसने सैंडल में जड़वाए हीरे-मोती, सगाई तोड़ किया प्रेम विवाह

भारत में अंग्रेजों के पहले जब राजवाड़े और रियासत हुआ करते थे तब बहुत से ऐसे राजा, राजकुमार, महारानी और राजकुमारियां हुई है जिनकी कहानियों को लोग आज भी काल्पनिक और परी कथाओं जैसा समझते हैं।
ऐसे ही बड़ोदरा के गायकवाड राजघराने की राजकुमारी थी जिनका नाम इंदिरा देवी था। इंदिरा देवी भारत के कुछ सबसे अमीर रजवाड़े बड़ोदरा राजघराने की राजकुमारी थी। उनका ज्यादातर समय यूरोप में बीता था और बड़ोदरा के इस राजकुमारी की शादी उनके पिताजी ने ग्वालियर राजघराने में यानी सिंधिया राजघराने में तय कर दिया था।
लेकिन उन्होंने सगाई होने के बाद भी सगाई तोड़ कर एक दूसरे राजकुमार से प्रेम विवाह किया था।
राजकुमारी इंदिरा गायकवाड की सगाई ग्वालियर के होने वाले राजा यानी युवराज माधो राव सिंधिया से हुआ था इसी बीच वह अपने छोटे भाई के साथ 1911 में दिल्ली दरबार गई थी दिल्ली दरबार यानी वायसराय का दरबार वहीं उनकी मुलाकात कूच बिहार के तत्कालीन महाराजा के छोटे भाई जितेंद्र से हुई और वह राजकुमार जितेंद्र से इतनी प्रभावित हुई कि उनसे उन्हें प्यार हो गया और उन दोनों ने विवाह करने का फैसला ले लिया।
हालांकि राजकुमारी की सगाई हो चुकी थी और जिस खानदान में उनकी सगाई हुई थी यानी ग्वालियर का सिंधिया खानदान वह भी उस समय बहुत ताकतवर राज्य था।
राजकुमारी इंदिरा गायकवाड ने यह सोचा यदि उनके पिताजी ने सगाई के लिए इंकार किया तो बड़ोदरा रियासत और ग्वालियर रियासत के बीच में राजनीतिक संबंध बिगड़ सकते हैं इसलिए उस जमाने में हिम्मत दिखाते हुए खुद राजकुमारी इंदिरा गायकवाड ने पत्र लिखकर अपने मंगेतर से कहा कि वह उनसे शादी नहीं करना चाहती।
बाद में बड़ोदरा में इंदिरा के पिता यानी महाराजा गायकवाड को ग्वालियर के महाराजा का एक लाइन का टेलीग्राम मिला की राजकुमारी के पत्र का क्या मतलब है ।
उन्होंने पहले जितेंद्र को चेतावनी दी कि वह उनकी बेटी से दूर रहें लेकिन जितेंद्र और इंदिरा आपस में शादी करने का मन बना चुके थे अंत में उनके पहले माता-पिता को बात माननी पड़ी और फिर लंदन में दोनों के विवाह हुआ।
इंदिरा और जितेंद्र ने लंदन के होटल में शादी की जिसमें इंदिरा के परिवार से कोई भी नहीं शामिल हुआ था।कुछ दिनों बाद जितेंद्र के बड़े भाई यानी कूच बिहार के महाराजा राजेंद्र नारायण का निधन हुआ फिर उसके बाद जितेंद्र कूच बिहार के महाराजा बने।
हालांकि इस दंपत्ति का वैवाहिक जीवन बेहद खुशनुमा रहा। उनके 5 बच्चे हुए।बाद में ज्यादा शराब पीने से महाराज जितेंद्र का भी निधन हो गया उसके बाद लंबे समय तक कूच बिहार राज्य का राजकाज महारानी इंदिरा देवी ने ही संभाला साथ ही साथ अपने पांचों बच्चों का लालन-पालन किया।उनका ज्यादा समय यूरोप में गुजरता था और बाद में उनकी एक बेटी गायत्री देवी की शादी जयपुर के महाराजा से हुई जो जयपुर की महारानी गायत्री देवी के नाम से मशहूर हुई। जिन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में गिना जाता था।
महारानी इंदिरा देवी जब बड़ोदरा की राजकुमारी थी तब फैशन की बेहद शौकीन थी उन्होंने उस जमाने में इटली की बहुत महंगी कंपनी सल्वातोरे फेरागेमो को अपने लिए 100 जोड़ी जूतियां बनाने का ऑर्डर दिया था यह कंपनी 20 वीं सदी की सबसे फेमस डिजाइनर कंपनी थी आज भी इस कंपनी के दुनियाभर में लग्जरी शोरूम है।
उन्हें सिल्क और शिफॉन की साड़ियां पहनने और उन्हें ट्रेंड देने का श्रेय जाता है।
( फोटो में इंदिरा देवी की बेटी गायत्री देवी )उनकी पसंदीदा फैशन स्टेटमेंट कंपनी सल्वातोरे फेरागमो के मालिक सल्वातोरे ने अपनी आत्मकथा में लिखा था एक बार महारानी ने उनकी कंपनी को जूते बनाने का ऑर्डर दिया और उन्होंने कहा था कि उनके लिए ऐसा सैंडल बनाया जाए जिसमें हीरे और मोती जड़े हो और उन्होंने आर्डर के साथ बेशकीमती हीरे जवाहरात और मोती भी भेजे थे।