स्मार्टफोन के बाद कार बाजार पर भी चीनी कंपनियों का कब्जा

स्मार्टफोन के बाद कार बाजार पर चीनी कंपनियों का कब्जा

  1. साल 2013 में चीन की प्रसिद्ध स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी शाओमी ने अपने पहले फोन Mi3 के साथ भारत में एंट्री की थी जिसके बाद ओपो और वीवो ने यहां कदम बढ़ाया और मात्र पांच सालों में ही देश के 78 प्रतिशत स्मार्टफोन बाजार कब्जा कर लिया वहीं अब चीनी कंपनियां देश के ऑटोमोबाइल पर कब्जा करने की फिराक में हैं ”
  2. बंद हुईं देसी कंपनियां – शाओमी की एंट्री के बाद 2014 में ओपो ने भारतीय स्मार्टफोन बाजार में अपनी अपनी एंट्री की और अपनी पहला एंड्रॉयड स्मार्टफोन N1 लॉन्च किया इसी साल वीवो ने भी भारतीय प्रवेश किया आज ओपो और वीवो दो ऐसी कंपनियां हैं जो भारतीय क्रिकेटर्स की जरसियों तक अपनी पहुंच बना चुकी हैं जबकि देश में इसे पहले की स्थापित कंपनियां कार्बन, माइक्रोमैक्स, लावा जैसे कंपनियां स्मार्टफोन विक्रेताओं की शेल्फ से भी गायब हो चुकी हैं। इनके आने के बाद सैमसंग के फोनों की बिक्री पर भी जबरदस्त असर पड़ा और एक समय में इसका मार्केट शेयर गिर कर 20 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया था ”
  3. लगातार हो रही है एंट्री – अब चीनी कंपनियां भारतीय ऑटोबमोबाइल सेक्टर में अपनी पकड़ बनाने की तैयारी कर रही हैं पिछले 3-4 सालों में तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भारतीय बाजार में एंट्री की इनमें से कुछ कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी की तो कुछ ने अपनी मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर खोल दिये ”
  4. बना रहीं सभी तरह के वाहन – ये कंपनियां भारतीय बाजार के लिये ई-स्कूटर्स, ई-बाइक्स,इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स, पेट्रोल बाइक्स, एसयूवी, लग्जरी कारें, बसें-ट्रक यानी सभी तरह के वाहन बना रही हैं 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति के तहत ये कंपनियां अपनी टेक्नोलॉजी के साथ भारतीय इलेक्ट्रिक बाजार पर कब्जा करने की तैयारी कर रही हैं इसकी वजह है कि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर अभी इलेक्ट्रिक कारों की टेक्नोलॉजी को लेकर परिपक्व नहीं है और बाहरी कंपनियों पर आश्रित है जिसका फायदा इन कपनियों को मिल रहा है ”
  5. चीन में 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियां – आज चीन में 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियां हैं 1990 में जहां चीन की इलेक्ट्रिक बाइक्स महज 20 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार नहीं पकड़ पाती थीं वहीं अब 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने लगी हैं दुनिया के 25 करोड़ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में अकेले 99 प्रतिशत चीन में ही हैं जो दुनिया में इलेक्ट्रिक यात्री कारों की कुल संख्या का लगभग 100 गुना है ”
  6. एंट्री के लिए बेकरार हैं कंपनियां – चीन कंपनियों की भारत में प्रवेश करने की बेकरारी इसी से देखी जा सकती है कि वे कर्ज में डूबी हुई कंपनियों में निवेश करने से नहीं घबरा रही हैं हाल ही में हांगझोऊ की सीएफमोटो कंपनी ने मध्यम और हल्के ट्रक बनाने वाली कंपनी एएमडब्ल्यू मोटर्स में 27.42 अरब रुपयों का निवेश किया है खास बात यह है कि एएमडब्ल्यू मोटर्स कर्ज में डूबी हुई बरबाद कंपनी है ”
  7. एमजी हेक्टर ने मचाया धमाल – नेक्स्ट जेनरेशन कंपनियों की बात करें तो चीन की स्वामित्व वाली सियाक मोटर्स की कंपनी मॉरिस गैराज यानी एमजी ने हाल ही में अपनी पहली एसयूवी एमजी हेक्टर लॉन्च की है जिसने आते ही बाजार में धमाल मचा दिया है 12.18 लाख की रुपये की शुरुआती कीमत वाली हेक्टर देश की पहली कनेक्टेड एसयूवी होने के साथ लुक, स्टाइल और फीचर्स के मामले में क्रेटा, जीप, हैरियर, एक्सयूवी500 जैसी एसयूवी को पीछे छोड़ चुकी है ”