स्वामी विवेकानन्द जयंती: वो सब कुछ जो आप स्वामी जी के बारे में जानना चाहते हैं, एक बार जरूर पढ़ें

जन्म स्थान व समय : स्वामी विवेकानंद :- 

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकत्ता में हुआ। जो कि वर्तमान समय में कोलकाता में स्थित है। उनके जन्म स्थान के बारे में तो जानकारी प्राप्त है, लेकिन समय के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं है।

बचपन : स्वामी विवेकानंद :- 

स्वामी विवेकानंद जी का बचपन बहुत ही सुख पूर्ण व्यतीत हुआ।  बचपन से ही बहुत कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। वे अपने साथियों के साथ बहुत ही शरारत करते थे, और कभी-कभी हुए अपने शिक्षकों के साथ भी शरारत कर देते थे। उनके बचपन का नाम विरेश्वर था।

स्वामी_विवेकानंद_जयंती

आरंभिक जीवन : स्वामी विवेकानंद :- 

 आरंभिक जीवन की शुरुआत उनके विद्यालय से होती है। जैसा कि आप जानते हैं, कि वह बचपन से बहुत ही तेज बुद्धि के बालक थे। उन्होने 8 साल की उम्र से पढ़ाई शुरू कर ली थी। उन्होंने साल की उम्र में ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटीन संस्थान में एडमिशन लिया व वहाँ शिक्षा प्राप्त करने लगे।

माता : स्वामी विवेकानंद :- 

उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। जोकि एक धार्मिक महिला थी। उनके घर में नियमित रूप से पूजा पाठ होता रहता था।

पिता : स्वामी विवेकानंद :- 

उनके  पिता जी का नाम विश्वनाथ दत्त था।  जो कि हाई कोर्ट की एक प्रसिद्ध वकील थे। वे पाश्चात्य सभ्यता मे  विश्वास रखने वाले थी। उन्होंने नरेंद्र को शिक्षा के लिए विदेश  भेजा।

दादाजी : स्वामी विवेकानंद :- 

उनके दादा जी का नाम दुर्गा चरण दत्ता था। जो कि संस्कृत व फारसी के विव्दांन थे।

संपूर्ण परिवार : स्वामी विवेकानंद:- 

उनका पूरा परिवार आध्यात्मिक था। वे बचपन में शिव भक्ति पर लगे रहते थे।  उनकी माता धार्मिक महिला थी।  जिस कारण से भी विवेकानंद जी को पुराणों की कथा सुनाया करती थी।

स्वामी विवेकानंद जयंती के लिए पहली कहानी :-

एक बार स्वामी विवेकानंद जी अपने बिस्तर पर लेटे हुए थे।  तभी वहां पर एक युवक आता है। और बोलता है कि स्वामी जी मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। तब स्वामी जी कहते है, कि पूछो व्यक्ति बोलता है। कि मैं अपने काम को बड़ी मेहनत व लगन  के साथ करता हूं। लेकिन मुझे सफलता प्राप्त नहीं होती है। तब स्वामी विवेकानंद जी उस व्यक्ति से कहते हैं कि तुम मेरी इस  कुत्ते को  घुमाकर ले आओ। तब तक मैं तुम्हारी समस्या का समाधान ढूंढता हूं।
                            तब वह व्यक्ति उस कुत्ते को घुमाने के लिए ले जाता है। कुत्ता इधर-उधर की चीजों को देखकर इधर-उधर भागता है।  बाद में जब दोनों घर पहुंचते हैं। तो कुत्ता हाँपता हुआ आता है।  तब स्वामी जी उस व्यक्ति से पूछते हैं। कि यह कुत्ता इतना ज्यादा क्यों  हाँप  रहा है। वह  उत्तर देता है कि यह इधर-उधर दोड रहा था।  जिस कारण से यह थक गया है। स्वामीजी कहते हैं कि इसी में तुम्हारा उत्तर है। अतः कहने लगते हैं   ” कि तुम अपने काम को तो बड़ी मेहनत के साथ करते हो लेकिन तुम अपने लक्ष्य को भूल जाते हो” इसी कारण  सफलता प्राप्त नहीं होती है।

स्वामी विवेकानंद जयंती के लिए दूसरी कहानी :- 

एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद जी समुद्र के किनारे बैठे कुछ सोच रहे थे। तभी वहां से एक युवक दौड़ता हुआ आता है। जिसकी पीछे की बंदर भागते हैं। स्वामी विवेकानंद जी यह सब चीजें देखते हैं और उस युवक से कहते हैं  “कि भागो मत सामना करो”  तभी वह युवक बंदरों की सामने खडा हो जाता है। और बंदर डर की मारे भाग जाते हैं ।

Source: Festive World