35 लाख का ट्रैक्टर बना लोगों के आकर्षण का केंद्र, पानी की बौछार का भी नहीं होगा असर

35 लाख का ट्रैक्टर बना लोगों के आकर्षण का केंद्र, पानी की बौछार का भी नहीं होगा असर

ट्रैक्टर को मोडिफाई करने में 35 लाख रुपये खर्च हुए हैं। महिंद्रा के इस ट्रैक्टर में आगे और पीछे दोनों तरफ बड़े-बड़े दो पहिए लगे हुए हैं। ऐसा लगता है मानो यह ट्रैक्टर नहीं बल्कि रोड रोलर हो।

 तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर चल रहा किसानों का धरना प्रदर्शन सोमवार को 61वें में प्रवेश कर गया है। इस बीच सभी किसान 26 नवंबर को होने वाले ट्रैक्टर परेड की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं, बॉर्डर पर जमे किसानों के बीच कुछ लोग अपनी अमीरी का प्रदर्शन कर गरीब किसानों की बात करते दिखाई देते हैं। अमीरी का यह प्रदर्शन कहीं मोडिफाई ट्रैक्टर तो कहीं मर्सिडीज कार से ट्रैक्टर को खींचने के रूप में दिखाई देता है। किसानों ने बताया कि इस ट्रैक्टर को इस तरह डिजाइन करवाया गया है कि बारिश का भी असर नहीं होगा। इतना ही नहीं जब पुलिस वाटर कैनन का इस्तेमाल करेगी तो वह भी बेअसर साबित हो जाएगा। 

बहादुरगढ़ से सटे टीकरी बॉर्डर पर पिछले कई दिनों से एक मोडिफाई ट्रैक्टर चर्चा का विषय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि इस ट्रैक्टर को मोडिफाई करने में करीब 35 लाख रुपये की लागत आई है। इतना महंगा ट्रैक्टर देख प्रदर्शन में शामिल किसानों की आंखें फटी रह जाती हैं। यह ट्रैक्टर सुनील गुलिया का है।

महिंद्रा के इस ट्रैक्टर में आगे और पीछे दोनों तरफ बड़े-बड़े दो पहिए लगे हुए हैं। ऐसा लगता है मानो यह ट्रैक्टर नहीं, बल्कि रोड रोलर हो। ट्रैक्टर के पीछे लगी ट्रॉली भी उतनी ही आकर्षक है। ट्रॉली में बैठने के लिए आरामदायक सोफे बनाए गए हैं। ट्रैक्टर में गीत-संगीत का भी भरपूर इंतजाम है। इस ट्रैक्टर के इर्दगिर्द आने वाले लोग आंदोलन की बातों को भूल इसे निहारने में लगे रहते हैं।

बताया जा रहा है कि एक ओर किसान कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन ट्रैक्टरों से यह कहीं नहीं लगता है कि ये किसान किसी भी तरह से कमजोर हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल आंदोलनकारी किसानों के बीच भी उठ रहा है कि क्या गरीब किसान इन बड़े किसानों के हाथों की कठपुतली तो नहीं बन रहे हैं।

वहीं, कुछ आंदोलनकारी किसान अमीरी के इस प्रदर्शन को सही नहीं ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से आंदोलन पर गलत असर पड़ेगा। वहीं, इन ट्रैक्टरों को देखकर स्थानीय लोग भी अब यह कहने लगे हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में यहां अमीरी का प्रदर्शन किया जा रहा है, ऐसे में गरीब किसानों का भला हो ही नहीं सकता है।