5 साल में 10,000 से 50 लाख महीना हुई कमाई, ऐसी है इस इंजीनियर की कहानी

कहते हैं, एक आइडिया इंसान की पूरी जिंदगी बदल देता है. 26 साल के इंजीनियर जुबैर इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. कभी सीसीटीवी ऑपरेटर की 10 हजार प्रतिमाह नौकरी करने वाले जुबैर की इस एक आइडिया ने कायापलट कर दी. महज पांच साल में वो 10 हजार प्रतिमाह सेलरी से 50 लाख रुपये प्रतिमाह तक कमाई के उनके इस सफर के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

बता दें कि साल 2014 में जुबैर रहमान तमिलनाडु के तिरुपुर में CCTV ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे. ये कॉलेज से निकलने के बाद उनकी पहली जॉब थी. 21 साल की उम्र में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के तौर पर ऑफिसों में जाकर वो अपने परिसर में सीसीटीवी लगाते थे. लेकिन जुबैर का सपना था कि वो अपना खुद का बिजनेस शुरू करें. लेकिन, उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो शुरुआत कैसे करें.

जुबैर ने बताया कि एक दिन जब वो एक ई-कॉमर्स कंपनी के कार्यालय में सीसीटीवी लगाने गए थे, तभी पहली बार ये आइडिया क्लिक किया. वो कहते हैं कि मैं वहां CCTV लगाने के लिए गया था. लेकिन, कंपनी के संचालन के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई. मैंने वहां के मैनेजर से बात की तो उन्होंने बताया कि कैसे कंपनी ऑनलाइन सोर्सिंग और आइटम बेचकर पैसा कमा रही है.

फिर ऐसे हुई शुरुआत
इसके बाद जुबैर ने महसूस किया कि कपड़ा ही अकेला ऐसा उत्पाद है जिसे वो तिरुपुर से सोर्स कर सकते हैं. तिरुपुर को देश की knitwear capital के तौर पर भी पहचान मिल चुकी है. ये एक मजबूत कपड़ा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां भारत के कपास निटवेअर निर्यात का 90 प्रतिशत का हिसाब किताब होता है. जुबैर का कहना है कि सबसे पहले मैंने ग्राउंड वर्क किया, दो महीने तक तिरुपुर के कई कपड़ा निर्माताओं से मुलाकात की. मैंने अपने दोस्तों से कपड़ा सोर्स करने में मदद मांगी, वहां से ये पता लगाने के लिए भी बात की कि किस तरह के कपड़े ऑनलाइन माध्यम से ठीक ढंग से बिक सकेंगे.

इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी. बेरोजगारी के दौर में इंजीनियरिंग में नौकरी छोड़ना बड़ी बात माना जाता है, लोगों ने उन्हें समझाया भी लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बिल्कुल भी न बिगाड़ते हुए आगे अपने उद्यम की तैयारी शुरू कर दी थी. उद्यम शुरू करने के बाद एकाध उतार-चढ़ाव के दौर में भी वो टिके रहे. अब इस ईकॉमर्स बिजनेस ने उन्हें 10 हजार प्रतिमाह से 50 लाख प्रतिमाह में पहुंचा दिया है. वो बताते हैं कि उनका अधिकांश पैसा बिजनेस रजिस्टर्ड करने और GST नंबर पाने में चला गया. मैंने कम मात्रा में कपड़े खरीदकर उन्हें ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया.

इन शुरुआती दिनों में जुबैर ने ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर कपड़े लिस्टेड करना शुरू किया, तब उन्हें दिन में सिर्फ एक या दो ऑर्डर मिल रहे थे. फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ी. यहां उन्होंने ये भी देखा कि सबसे ज्यादा कॉम्बो पैक में बच्चों के कपड़ों की मांग है. इसका मतलब यह था कि उन्होंने प्रत्येक पैक को 550 रुपये से 880 रुपये के बीच में बेचा. इसमें मार्जिन भले ही कम था लेकिन इसकी मांग ज्यादा थी.

जुबैर की रणनीति ने इतनी अच्छी तरह से काम किया कि ‘द फैशन फैक्टरी’ को अब हर दिन 200 से 300 ऑर्डर मिलते हैं. दावा है कि उनकी कंपनी हर महीने 50 लाख राजस्व कमाती है. जुबैर बताते हैं कि उनकी कंपनी फैशन फैक्टरी सालाना 6.5 करोड़ रुपये का राजस्व कमाती है, और अगले एक साल में 12 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है. वो कहते हैं कि उनके पिता कपड़ा निर्माता थे, मुझे उनके अनुभवों का भी फायदा मिला.

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