68 साल का प्रधानमंत्री और खूबसूरत चाइनीज़ एंबेसडर… हनीट्रैप में फँसा नेपाल!

चीन के साथ नेपाल की रहस्यमय नज़दीकियों के बीच प्रधानमंत्री केपी ओली को लेकर अटकलें तेज़ होती जा रही हैं। जिस तरह से पिछले कुछ साल में केपी शर्मा ओली ने चीन के साथ नज़दीकियां बढ़ाई हैं उसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हैं। इनमें जो सबसे अहम है वो यह कि नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यान्की (Hou Yanqi) ने केपी ओली को हनीट्रैप (सेक्स के ज़रिए फँसाना और ब्लैकमेल करना) कर रखा है। यह बात सही है कि नेपाल में राजशाही ख़त्म होने के बाद से ही चीन की दख़लंदाज़ी बढ़ रही थी, लेकिन वहाँ की सरकारें हमेशा इस बात का ध्यान रखती रही हैं कि भारत के साथ रिश्ते ख़राब न होने पाएं। क्योंकि तेल समेत बहुत सारे सामान की सप्लाई के लिए नेपाल आज भी पूरी तरह भारत पर आश्रित है।

चीनी राजदूत के जाल में ओली?

नेपाल के राजनीतिक और मीडिया सर्किल में पीएम केपी ओली और चीन की राजदूत की करीबी की चर्चाएँ काफ़ी समय से रही हैं। लेकिन पिछले दिनों में जिस तरह से केपी ओली कठपुतली की तरह काम करते नज़र आए उससे लोगों की आशंकाओं को हवा मिली है। केपी ओली रंगीले स्वभाव के हैं और यह बात उनकी पार्टी के सहयोगी भी अच्छी तरह जानते हैं। इसी कारण उन्हें नेपाल का जवाहरलाल नेहरू भी कहा जा रहा है। इस बात की ख़बर भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी है। भारतीय सेना के पूर्व मेजर गौरव आर्या ने इस बारे में एक ट्वीट भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है “प्रधानमंत्री ओली को चीन के दूतावास ने हनीट्रैप कर रखा है। यही कारण था कि चीन ने नेपाल के गाँवों पर क़ब्ज़ा कर लिया और ओली कुछ नहीं बोले।”

नेपाल में राजदूत की दख़लंदाज़ी

राजदूत होऊ यान्की का नेपाल की राजनीति में ज़बरदस्त प्रभाव है। वो न सिर्फ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं, बल्कि चीन के मीडिया पर भी धौंस ज़माने का काम करती रहती हैं। नेपाल में इस बात की भी चर्चाएँ हैं कि होऊ यान्की ने ही नेपाल के नए राजनीतिक मैप को बनाया है, जिसमें उत्तराखंड में भारत के बड़े इलाक़े पर नेपाल ने अपना दावा ठोंका है। यह किसी से छिपा नहीं है कि होऊ यान्की की सीधी दखल प्रधानमंत्री के दफ्तर और निवास में है। किसी देश की राजदूत की प्रधानमंत्री के साथ ये करीबी तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी में बग़ावत के पीछे भी यही कारण है।

नेपाल में भारत विरोध के पीछे हाथ

नेपाल में पिछले कुछ साल में बढ़ते भारत विरोध के पीछे भी चीनी राजदूत का हाथ माना जाता है। उसने न सिर्फ़ नेपाल के पूरे सरकारी तंत्र, बल्कि सामाजिक संस्थाओं को भी अपने प्रभाव में ले रखा है। इन्हीं के ज़रिए वो भारत विरोधी माहौल बनाती है। आए दिन होने वाले भारत विरोधी प्रदर्शनों के पीछे भी सीधे तौर पर चीन की फ़ंडिंग होती है।