83 रुपये में घर: खरीदने वालों की लगी होड़, इसलिए बेचा जा रहा इतने कम में

दरअसल, 14वीं शताब्दी में बसा ये गांव अब अर्बन जंगल (Urban forest) में तब्दील हो चुका है और यहां के अधिकांश घरों की हालत जर्जर हो चुकी है। इसी वजह से यहां के लोग गांव छोड़कर शहरों में बस गए हैं। अब यहां के मकान खाली हो गए हैं, जिसे स्थानीय प्रशासन बेच रहा है। 

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83 रुपये में घर: खरीदने वालों की लगी होड़, इसलिए बेचा जा रहा इतने कम में (फोटो- सोशल मीडिया)

सिसली: आज के दौरान में जहां घर बनाना इतना मुश्किल हो गया है, ऐसे समय में एक ऐसा भी देश है, जहां पर केवल 83 रुपये में घर बेचा जा रहा है। जी हां, 83 रुपये में सरकार घर बेच रहा है। हम बात कर रहे है इटली (Italy) की, जहां पर 83 रुपये देकर हजारों विदेशियों ने घर खरीद लिया है। लेकिन अब स्थानीय लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन उनका घर बेच रहा है।

कहां बिक रहे इतने सस्ते में घर

बता दें कि इतने सस्ते घर इटली के सिसली आइलैंड (Sicily Islands) पर बिक रहे हैं। दरअसल, 14वीं शताब्दी में बसा ये गांव अब अर्बन जंगल (Urban forest) में तब्दील हो चुका है और यहां के अधिकांश घरों की हालत जर्जर हो चुकी है। इसी वजह से यहां के लोग गांव छोड़कर शहरों में बस गए हैं। अब यहां के मकान खाली हो गए हैं, जिसे स्थानीय प्रशासन बेच रहा है।

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(फोटो- सोशल मीडिया)

स्थानीय लोग कर रहे हैं विरोध

लेकिन मकान बेचे जाने का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। इस पर सिसली के मेयर लिओलुका ने कहा कि उन्होंने इस गांव की आबादी बढ़ाने की संकल्प लिया है, इसलिए यहां के मकानों को केवल 83 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं, इतने कम दाम में मिलने की वजह से यहां पर मकाने खरीदने वालों की होड़ लग गई है। हजारों की संख्या में विदेश अब तक घर खरीद चुके हैं।

गांव वालों ने खड़े किए कई सवाल

हालांकि मेयर को अपने योजना को लेकर तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा जब गांव छोड़ चुके लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने पूछा कि गांव हमारा, घर हमारे तो फिर उसे बेचने वाला प्रशासन कौन होता है? इसके जवाब में मेयर लिओलुका ने कहा कि गांव के ज्यादातर घर बुरी हालत में हैं। यहां की आबादी लगातार घट रही है, ऐसे में हमारा फर्ज है कि हम गांव को पहले की तरह हरा भरा रखने के लिए ऐसे फैसले करें।

वहीं, एक स्थानीय महिला का आरोप है कि प्रशासन द्वारा घरों को बेचने के लिए इजाजत तक नहीं ली गई है। अब वहां पर इस फैसले पर विवाद होता दिख रहा है।