9 साल बाद खूनी बदला: सरपंच का हत्‍यारा जमानत पर आया तो भाई ने मार दी गोली

निंबरी गांव के सरपंच की हत्या (Murder) के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शराब ठेकेदार कुलदीप की हत्या कर दी गई. वह जमानत पर जेल से बाहर आया हुआ था.

9 साल बाद खूनी बदला: सरपंच का हत्‍यारा जमानत पर आया तो भाई ने मार दी गोली

पानीपत. हरियाणा के पानीपत के निंबरी गांव के सरपंच की हत्या (Murder) के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शराब ठेकेदार कुलदीप की हत्या कर दी गई. वह जमानत पर आया हुआ था. शराब ठेकेदार पर पहले गंडासी और डंडों से हमला किया गया, फिर सिर में दो गोलियां दागकर हत्या कर दी. हत्या का आरोप पूर्व सरपंच के भाई पर लगा है. बताया जा रहा है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया. हत्या के बाद आरोपित युवक बाइक से फरार हो गए. इस वारदात में एक हत्यारोपी भी घायल हो गया है. इस घटना के बाद निम्बरी गांव में तनाव बना हुआ है. पुलिस का आरोपियों और पीड़ि‍तों के घरों के बाहर पहरा है. घटना बीते सोमवार रात की है.

निंबरी गांव के 38 वर्षीय कुलदीप उर्फ बीका ने गांव के बस अड्डे के पास निंबरी-बापौली रोड पर शराब के ठेके में सोनू मालपुरिया के साथ हिस्सा कर रखा था. कुलदीप शराब के ठेके के बाहर टहल रहा था. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान पूर्व सरपंच राकेश उर्फ राका का छोटा भाई विकास उर्फ विक्का दो अन्य साथियों के साथ आया और कुलदीप पर डंडों व गंडासी से हमला कर दिया. इस हमले से बचा तो दो गालियों दाग दीं. हत्या कर तीनों आरोपित भाग गए. थाना सदर पुलिस ने मौके से दो खाली कारतूस बरामद किए हैं. पुलिस ने मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया.

पुरानी रंजिश के चलते वारदात
विज्ञापनमामले की जानकारी देते हुए डीएसपी सतीश वक्त ने बताया कि पुरानी रंजिश के चलते शराब के ठेकेदार की हत्या की गई है और पुलिस द्वारा मृतक के परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है. शव का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया गया है. अभी कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. वर्ष 2011 में राकेश उर्फ राका का बिजेंद्र के साथ रास्ते में मिट्टी डालने को लेकर विवाद हो गया था. 16 जून 2011 को बिजेंद्र ने कुलदीप उर्फ बीका, बीका के भाई राम, लक्ष्मण और नीरज के साथ मिलकर राकेश को डंडों से पीट-पीटकर मार डाला था. इस मामले में आरोपितों को उम्रकैद की सजा हुई थी. दोषियों ने हाई कोर्ट में चायिका दायर की थी. कुलदीप वर्ष 2017 में हाई कोर्ट से जमानत पर था.