Kangna Ranaut vs Sanjay Raut : शिवसेना को कंगना से पंगा लेने के मिल सकते हैं ये फायदे!

Kangna Ranaut vs Sanjay Raut: सवाल उठता है कि क्या शिवसेना ने जानबूझ कर कंगना से पंगा लिया. या फिर कंगना से पंगा लेकर उद्धव ठाकरे और उनकी टीम फंस गई है. अगर ध्यान से पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो फिर इस लड़ाई से शिवसेना को फायदे नजर आते हैं.

Kangna Ranaut vs Sanjay Raut : शिवसेना को कंगना से पंगा लेने के मिल सकते हैं ये फायदे!

 कंगना रनौत और शिवसेना के सांसद संजय राउत (Kangna Ranaut vs Sanjay Raut) के बीच जुबानी जंग ने अब राजनीति का रंग ले लिया है. बड़े मंच पर अब इस लड़ाई को बीजेपी और शिवसेना आगे बढ़ा रही है. संजय राउत की तरफ से पहले कंगना को भद्दी गाली देना और फिर उनके ऑफिस पर बुलडोजर चलवाना. राउत के इस कदम की हर तरफ आलोचना हो रही है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस लड़ाई में शिवसेना का साथ दे रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या शिवसेना ने जानबूझ कर कंगना से पंगा लिया. या फिर कंगना से पंगा लेकर उद्धव ठाकरे और उनकी टीम फंस गई है. अगर ध्यान से पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो फिर इस लड़ाई से शिवसेना को फायदे नजर आते हैं.

कंगना Vs संजय राउत

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से कंगना मीडिया में लगातार मुखर हैं. वो बॉलीवुड से जुड़े लोगों पर लगातार हमले कर रही हैं. लेकिन 3 सितंबर को अचानक उनके तेवर बदल गए. कंगना ने शिवसेना सांसद संजय राउत की आलोचना करते हुए मुंबई को ‘पीओके’ बता दिया. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेताओं ने पहले दिन कंगना का समर्थन किया. लेकिन बाद में कंगना के इस बयान से महाराष्ट्र बीजेपी पीछे हट गई. लेकिन शिवसेना कंगना से उलझती रही. दरअसल शिवसेना इस लड़ाई से अपना फायदा देख रही थी. ये हैं वो फायदे…

बीजेपी की नेगेटिव इमेज

कंगना के पीओके वाले बयान की कई लोगों ने आलोचना की. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेता भी उनके खिलाफ हो गए. बीजेपी नेता राम कदम ने कंगना की तुलना झांसी की रानी से की. बीजेपी के नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि वो कंगना की बातों से सहमत नहीं हैं. कुछ ही देर में ट्विटर पर आमची मुंबई हैशटैग वायरल हो गया. लेकिन दिल्ली में कई नेता कंगना के समर्थन में खड़े रहे. बीबीसी के मुताबिक इसकी वजह से महाराष्ट्र बीजेपी की राज्य में एक नेगेटिव इमेज बनने लगी. अगर बीजेपी की इमेज मुंबई में ख़राब होती है तो इससे शिवसेना को फ़ायदा होगा. कई राजनीतिक विश्लेषकों को भी लगता है कि ये मसला बीजेपी की महाराष्ट्र विरोधी छवि बनाने के लिए किया जा रहा है.