गणतंत्र दिवस : दिलचस्प है इस क्रांतिकारी की कहानी, अंग्रेज अफसर को थाने में जला दिया था जिंदा

देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले वीर सपूतों के बलिदानों को भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि उन्होंने देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण की बाजी लगा दी थी। इनमें पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में 1927 में जन्मे और अब काशी में रह रहे स्वतंत्रता सेनानी वीके बनर्जी किशोरावस्था में अपने रिश्तेदार के घर मुजफ्फरपुर (बिहार) आए थे।

यहां अगस्त क्रांति में देश का साथ दे रहे युवाओं के साथ मिलकर मीनापुर पुलिस चौकी पर जैक फ्लैग उतारकर तिरंगा फहरा रहे थे कि झंडे की गांठ फंस गई। जिसे खोलने के लिए एक बच्चे को पोल पर चढ़ाया गया, तभी अंग्रेज थानेदार ने उसे गोली मार दी।

इससे बौखलाए देश प्रेमियों ने उसे दौड़ाकर अरहर के खेत में पकड़ लिया। थाने में लाकर लाठियों की गठ्ठर बनाकर उसे थाने सहित जिंदा जला दिया। इस दौरान पहुंची अंग्रेजी सेना से युवाओं की मुठभेड़ हुई, जिसमें वह पकड़ लिए गए।

जेलों में जगह न होने पर सभी को समीप के एक स्कूल में बंद किया गया, मगर भोर में वह किसी तरह भाग निकले और नेपाल चले गए। यहां से वापस रक्सौल में आकर रेलवे के तार को काटते हुए पकड़ लिए गए। इस पर डेढ़ साल की जेल और 16 बेत की सजा सुनाई गई। जिसे उन्होंने मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, पटना और भागलपुर जेल में काटा।