UPSC IAS इंटरव्यू में पूछा- आप इतने दुबले पतले क्यों हो, जानें दिलचस्प जवाब

UPSC IAS इंटरव्यू में पूछा- आप इतने दुबले पतले क्यों हो, जानें दिलचस्प जवाब

UPSC IAS interview question: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का इंटरव्यू अमूमन 20 से 25 मिनट तक चलता है। आखिर इन कुछ मिनटों के दौरान कैसे आंका जाता है कि आप सिविल सेवा अधिकारी बनने लायक है या नहीं? आप इस देश की सर्वोच्च सिविल सेवाओं में शामिल होने के काबिल है या नहीं। अपनी किताब ‘द स्टील फ्रेम: ए हिस्ट्री ऑफ आईएएस’ को लेकर दिए एक इंटरव्यू के दौरान यूपीएससी के पूर्व चेयरमैन दीपक गुप्ता ने कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सिलेबस में यह साफ साफ लिखा होता है कि इंटरव्यू का क्या उद्देश्य है। हर उम्मीदवार को इस पर जरूरी नजर डालनी चाहिए। उसमें लिखा होता है उम्मीदवार का एटीट्यूट, कम्युनिकेशन एबिलिटी, लॉजिकल रीजनिंग चेक की जाएगी। इंटरव्यू में उम्मीदवार को नॉलेज का नहीं बल्कि उसकी अवेयरनेस का टेस्ट होता है। नॉलेज पहले की परीक्षाओं में हो चुकी होती है। देश दुनिया की हलचल से आपका रूबरू होना जरूरी होता है। इसके अलावा आप जो भी बात कहें उसके हर पहलू से आपको अवगत होना चाहिए। अगर इंटरव्यू बोर्ड में से कोई सदस्य आपके जवाब पर काउंटर कर दें तो आप क्या कहेंगे। हर पहलू के बारे में सोचना चाहिए। हर विषय को गंभीरता से लेने और समझने की जरूरत होती है। कॉन्फिडेंस, नॉर्मल और नेचुरल होना चाहिए। 

उन्होंने बताया कि उम्मीदवार के अंदर से एक ईमानदार इंसान की झलक दिखनी चाहिए। एक पुराने वाकये का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक बार इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य ने उम्मीदवार से पूछा – Why are you so Lean and Thin? ( आप इतने दुबले पतले क्यों हैं? ) । उम्मीदवार ने जवाब में कहा- Sir, IAS is not joke and Allahabad University is not sanatorium । ( आईएएस कोई मजाक नहीं है और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कोई सेनेटोरियम (जहां मरीजों को स्वस्थ करने के लिए लंबे समय तक रखा जाता है) नहीं है। 
यूपीएससी के पूर्व चेयरमैन ने कहा- तो इस तरह आपके अंदर से एक ईमानदार आदमी की झलक दिखनी चाहिए। आपको अपनी बात को कहना, आर्ग्यू करना आना चाहिए। आपको आगे बहुत बड़ी जिम्मेदारी संभालनी है।

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UPSC CSAT में कोई दिक्कत नहीं
वीडियो इंटरव्यू में दीपक गुप्ता ने कहा कि ऐसा कहना गलत है कि UPSC का CSAT पैटर्न आर्ट्स वालों के खिलाफ है या साइंस वालों की मदद करता है। क्वेश्चन पेपर के स्टैंडर्ड को देखना जरूरी है। आमतौर पर CSAT जैसे प्रश्न बैंक समेत अन्य बहुत सी सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। ये लॉजिकल क्वेश्चन होते हैं। आईएएस परीक्षा में बैठ रहे हैं तो आपका कॉम्प्रिहेंशन टेस्ट किया जा रहा है। कॉम्प्रिहेंशन तो आर्ट्स व साइंस दोनों स्ट्रीम के स्टूडेंट्स कर सकते हैं। रीजनिंग के सवाल सभी को आने चाहिए। ये मुश्किल क्वेश्चन नहीं होते। बहुत सारी कमिटीज ने गहन विचार-विमर्श के बाद सीसैट की सिफारिश की थी। आईएएस बनना चाह रहे युवाओं को थोड़ी बहुत इंग्लिश आनी चाहिए। ग्लोबलाइजेशन के दौर में इंग्लिश का आना जरूरी है।

दीपक गुप्ता ने सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर और जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में एमफिल किया हुआ है। 2011 में मिनिस्ट्री ऑफ रिन्यूवल एनर्जी (MNRE) में सेक्रेटरी पद से रिटायर होने के बाद वह कंसल्टेंट के तौर पर वर्ल्ड बैंक व UNIDO. में भी रहे। वर्तमान में वह NSEF के महानिदेशक हैं।

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हर वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों — प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार– में आयोजित की जाती है। इसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) सहित अन्य सेवाओं के लिए चयन किया जाता है।

DAF से पूछे जाते हैं ज्यादातर सवाल
आपके डीएएफ (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) से ही ज्यादातर प्रश्न पूछे जाते हैं। डीएएफ देखकर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य प्रश्न बनाते चले जाते हैं। आप कहां से पासआउट हैं, किस जिले, गांव के रहने वाले हैं, आपका बैकग्राउंड, आपकी रुचि वगैरह वगैरह से प्रश्न जरूर पूछे जाते हैं। 

एक उदाहरण- यूपीएससी क्रैक करने वाले सूरज पटेल ने अपने डीएफएफ में लिखा हुआ था कि उन्होंने जूनियर स्तर पर बॉक्सिंग की है। इंटरव्यू बोर्ड में एक अन्य मेंबर ने उनसे पूछा था- तुम माइक टायसन के बारे में जानते हो? तो मैंने कहा हां मैं जानता हूं। पूर्व अमेरिकी बॉक्सर हैं, कई रिकॉर्ड इनके नाम हैं। कई बार इनका नाम विवादों में रहा। मुझसे 2016 के इंटरव्यू में मोहम्मद अली के बारे में सवाल पूछा गया था। मुझसे पूछा गया था कि पूर्व अमेरिका महान बॉक्सर मोहम्मद अली को कुछ सालों पहले बराक ओबामा ने सम्मानित किया था। तो वो क्यों सम्मानित किया था? मुझे इस प्रश्न का उत्तर नहीं पता था। मैंने साफ कहा कि मुझे नहीं पता। तो उन्होंने बताया कि मोहम्मद अली ही एक ऐसे इकलौते अमेरिकी बॉक्सर थे जिन्होंने वियतनाम युद्ध में अमेरिकी की ही नीतियों की आलोचना की थी।”