पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग क्या है ? और इसका निदान कैसे करें, यहां जानें

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) प्रजनन आयु वर्ग में पायी जाने वाली एक प्रमुख हार्मोनल समस्या बनती जा रही हैं।यह 18 से 45 वर्ष कि आयु वाली वयस्क महिलाओं में पाया जाता है। सन्तान पैदा करने वाले उम्र की लगभग 5 से 10 प्रतिशत महिलाएं पीसीओएस से प्रभावित होती हैं लगभग 70 से 80 प्रतिशत महिलाओं में निसंतांतता की समस्या पाई जाती हैं।

डॉ संध्या प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बी एच यू की सीनियर रेजिडेंट ने जानकारी देते हुए बताया कि पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। जिसमें तीन प्रमुख समस्या पाई जाती हैं-


• मासिक धर्म की अनियमितता, 

• पुरुष हॉरमोन यानि कि एंड्रोजन की अधिक मात्रा (hyperandrogenism)

• अंडाशय में छोटे छोटे पानी के गांठ (cyst) बनना

जिसकी वजह से अंडो की गुणवत्ता कम हो जाती हैं एवम् ओव्यूलेशन नहीं हो पाता हैं।
पीसीओएस का कोई सटीक कारण अभी तक नहीं पाया गया है मगर पीसीओएस की 80 प्रतिशत महिलाओं में इन्सुलिन  प्रतिरोध मौजूद होता है। यही इन्सुलिन प्रतिरोध पीसीओएस में होने वाली समस्याओं को पैदा करती हैं।

बदलती जीवनशैली , तनाव, अधिक वजन होना, धूम्रपान, जंक फूड्स, यह सभी पीसीओएस केे कारण बन सकते हैं।
पीसीओएस अनुवांशिक भी होता है। पीसीओएस केे लक्षण जैसे कि किशोरावस्था में अधिक वजन , मुहांसे का अधिक होना, मासिक धर्म समस्या जैसे कि  मासिक का देर से आना , कम आना, दवा लेने पर ही आना, अनियमित रक्तस्राव, निसंतान्तता,अनचाहे बालो का होना, थकावट का रहना। अतः इन लक्षणों के होने पर डॉक्टर की अवश्य सलाह लें।
अगर पीसीओएस को नज़रंदाज़ किया गया तो आगे चलकर यह उच्च रक्तचाप एवम् डायबिटीज का कारण भी बन सकता है।

आमतौर से अल्ट्रासाउंड तथा हार्मोनल जांचों के द्वारा पीसीओएस का पता लगाया जा सकता है।
पीसीओएस केे उपचार में अगर हम देखे तो महिलाओं के प्रमुख समस्या पर निर्भर करता है पर यह जानना बहुत जरूरी है व्यायाम , वजन कम करना एवम् संतुलित आहार ये सभी चीजे पीसीओएस में होने वाली समस्याओं को कम करती हैं।
भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, मशरुम, दालचीनी, मौसम अनुसार, फल, अण्डा, दूध , दही इन सभी का प्रयोग अवश्य करें।

डॉ संध्या, सीनियर रेजिडेंट, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

डा संध्या ने बताया कि अगर महिलाओ को निसंतन्ता की समस्या हैं तो इन महिलाओ में मासिक नियमित करने की दवा तथा अण्डा बनने की दवा दी जा सकती हैं। साथ ही शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस यानि इन्सुलिन की गतिरोध कम करने की दवा दी जा सकती हैं।